Chhattisgarh Balrampur News : बलरामपुर। जिले के ग्राम पंचायत मुरकौल में संचालित शासकीय हाईस्कूल इन दिनों शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है। विद्यालय में कक्षा 11वीं और 12वीं में करीब 170 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन पर्याप्त और विषयवार शिक्षक नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। लंबे समय से शिक्षकों की व्यवस्था की मांग के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से विद्यार्थियों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
विद्यालय में साइंस, गणित और आर्ट्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई संचालित है, लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते विद्यार्थियों को सभी विषयों की नियमित पढ़ाई नहीं मिल पा रही है। इसका असर उनकी शैक्षणिक तैयारी और आगामी परीक्षाओं पर पड़ने की आशंका है।
मुरकौल हाईस्कूल में केवल मुरकौल ही नहीं, बल्कि आसपास के लमोरी, गोंदला, बैकुंठपुर, स्याही, वीरेंद्रनगर, डाला और पीपर सहित कई गांवों के विद्यार्थी पढ़ने पहुंचते हैं। ऐसे में विद्यालय में शिक्षकों की कमी का असर बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों की कमी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इस संबंध में कई बार विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक पर्याप्त एवं विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में शिक्षा विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
शिक्षकों की कमी से परेशान विद्यार्थियों का आक्रोश अब सड़क पर दिखाई देने लगा है। छात्र अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर आंदोलन करने को मजबूर हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि समय रहते विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई तो इसका असर परीक्षा परिणाम के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी पड़ सकता है।
ग्रामीणों और विद्यार्थियों का कहना है कि सरकार ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन मुरकौल हाईस्कूल की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। करीब 170 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में यदि पर्याप्त शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य कैसे पूरा होगा।
ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने शिक्षा विभाग से तत्काल पर्याप्त संख्या में विषयवार शिक्षकों की पदस्थापना करने की मांग की है, ताकि पढ़ाई सुचारू रूप से संचालित हो सके और विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शिक्षकों की कमी दूर नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।

