Chhattisgarh Raipur News : रायपुर। राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर यात्रियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। करीब पांच लाख की आबादी वाले शहर के प्रमुख मार्गों पर नियमित सिटी बसें उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को छोटे सफर के लिए भी ऑटो और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। नगर निगम के पास फिलहाल 35 सिटी बसें हैं, लेकिन ये सभी मुख्य रूप से शहर से बाहर के मार्गों पर संचालित हो रही हैं।
निगम की बसें खरोरा, भांसोज, खैरखुट, चंद्रखुरी और कोटनी जैसे बाहरी क्षेत्रों तक चल रही हैं, जबकि रेलवे स्टेशन से भाठागांव बस स्टैंड, संतोषी नगर, पचपेड़ी नाका, टाटीबंध, आमानाका, रायपुरा और महादेव घाट जैसे प्रमुख शहर मार्गों पर नियमित सिटी बस सेवा नहीं है। इन इलाकों में दिनभर बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है।
सबसे ज्यादा परेशानी रेलवे स्टेशन से भाठागांव बस स्टैंड के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को हो रही है। करीब छह किलोमीटर की दूरी के लिए सिटी बस नहीं मिलने पर लोगों को ऑटो का सहारा लेना पड़ता है। यात्रियों का कहना है कि कई बार इस छोटे सफर में भी 250 से 300 रुपये तक खर्च हो जाते हैं। परिवार के साथ यात्रा करने पर यह खर्च और बढ़ जाता है।
शहर के प्रमुख इलाकों में बस सुविधा नहीं होने का असर रोजाना सफर करने वाले कर्मचारियों, छात्रों, यात्रियों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए लोगों के पास ऑटो या निजी वाहन का विकल्प ही बचता है।
वहीं, शहर के भीतर सार्वजनिक परिवहन की कमी से निजी वाहनों का दबाव भी बढ़ रहा है। दोपहिया, कार और ऑटो की संख्या बढ़ने से प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में शहर के अंदरूनी इलाकों को बाहरी क्षेत्रों से जोड़ने वाले नए और जरूरत आधारित बस रूट शुरू करने की मांग उठ रही है।
उपलब्ध 35 बसों के संचालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि बसों का रूट तय करते समय आबादी, यात्रियों की संख्या और दैनिक मांग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि शहर के भीतर रहने वाले लोगों को भी सस्ती और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन सेवा मिल सके।
इस मामले में रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने जल्द व्यवस्था में सुधार का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि निगम अधिकारियों के साथ एक-दो दिन में बैठक कर वर्तमान में संचालित बसों में से कुछ बसों को शहर के अंदर चलाने को लेकर चर्चा की जाएगी। उपलब्ध व्यवस्था और बातचीत के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
अब देखना होगा कि बैठक के बाद शहर के प्रमुख मार्गों पर सिटी बसों के रूट में कितना बदलाव किया जाता है और यात्रियों को महंगे ऑटो सफर से कब राहत मिलती है।

