Chhattisgarh Sakti News: सक्ती। ग्राम पंचायत किकिरदा में विकास कार्यों के नाम पर किए गए कथित भुगतानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पंचायत के पंचों ने कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और जनपद पंचायत सीईओ को लिखित शिकायत सौंपकर विभिन्न कार्यों, बिल-वाउचर और भुगतान अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में सरपंच गोमती बाई मांझी, सचिव सहित अन्य संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।
पंचों का आरोप है कि पंचायत में कई ऐसे कार्यों और सामग्री के नाम पर बिल प्रस्तुत कर भुगतान किया गया, जिनका मौके पर वास्तविक कार्य या बिल के अनुरूप सामग्री उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने दस्तावेजों की जांच के साथ मौके का भौतिक सत्यापन और तकनीकी परीक्षण कराने की मांग की है।
शटर लगाने के नाम पर 37,200 रुपये के भुगतान पर सवाल
शिकायत के अनुसार पटेल भवन के पास स्थित अटल व्यावसायिक परिसर में शटर लगाने के नाम पर 37,200 रुपये का बिल प्रस्तुत किया गया। पंचों का दावा है कि मौके पर पुराने तीन शटरों में डेंटिंग-पेंटिंग का काम कर उसे नया शटर लगाने के कार्य के रूप में दर्शाया गया। ऐसे में बिल में दर्ज कार्य और मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की गई है।
बोर खनन की गहराई को लेकर भी आपत्ति
ग्राम कटही में आंगनबाड़ी भवन के सामने 365 फीट और विशेश्वरी मंदिर के पास 384 फीट बोर खनन के बिल लगाए जाने की शिकायत की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दोनों स्थानों पर करीब 120-120 फीट तक ही खुदाई हुई है। पंचों ने वास्तविक गहराई, उपयोग की गई सामग्री और भुगतान राशि का तकनीकी परीक्षण कराने की मांग की है।
डस्टबीन के बिलों पर भी उठे सवाल
शिकायत में डस्टबीन के नाम पर 14 हजार और 6 हजार रुपये के दो अलग-अलग बिल प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है। पंचों का दावा है कि मौके पर बिल में दर्शाई गई राशि के अनुरूप डस्टबीन उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए संबंधित बिलों और मौके पर उपलब्ध सामग्री का सत्यापन कराने की मांग की गई है।
जेआई पाइप के बिल पर भी पंचों ने जताई आपत्ति
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बोर खनन में प्लास्टिक पाइप का इस्तेमाल किए जाने के बावजूद जेआई पाइप का बिल लगाया गया। इसके लिए करीब 85,400 रुपये के भुगतान की जांच की मांग की गई है।
इसी तरह मंदिर के पास कराए गए बोरिंग कार्य में केसिंग और प्लास्टिक पाइप लगाए जाने के बावजूद जेआई पाइप का बिल लगाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में 1.05 लाख रुपये के भुगतान की जांच की मांग की गई है।
निर्माण सामग्री के 1.12 लाख रुपये के बिल पर सवाल
शिकायत के अनुसार आयुष ट्रेडर्स से सीमेंट, गिट्टी, दरवाजा सहित अन्य निर्माण सामग्री के नाम पर 1.12 लाख रुपये का बिल प्रस्तुत कर राशि का आहरण किया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित कार्य मौके पर हुआ ही नहीं अथवा बिल में दर्शाई गई सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई। पंचों ने स्थल निरीक्षण कर मामले की जांच कराने की मांग की है।
तालाब की मिट्टी निकालकर बेचने का आरोप
शिकायत में ग्राम के तालाब की जेसीबी से खुदाई कर निकली मिट्टी को बेचने का आरोप भी लगाया गया है। पंचों ने इस मामले में सरपंच और उपसरपंच की भूमिका की जांच करने तथा मिट्टी की बिक्री से प्राप्त राशि का हिसाब लिए जाने की मांग की है।
शिकायत के 15 दिन बाद भी जांच शुरू नहीं होने का आरोप
पंचों का कहना है कि शिकायत सौंपे करीब 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जांच की कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक मामले में केवल दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि मौके का भौतिक सत्यापन, बिल-वाउचर, भुगतान अभिलेख, माप पुस्तिका और संबंधित निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच भी जरूरी है।
पंचों ने प्रशासन से तत्काल जांच टीम गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में शासकीय राशि के दुरुपयोग या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
पहले भी पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठ चुके हैं सवाल
शिकायतकर्ताओं के अनुसार इससे पहले भी पंचायत के कार्यों में सरपंच के स्थान पर उनके प्रतिनिधियों द्वारा कथित रूप से हस्तक्षेप किए जाने के आरोप सामने आ चुके हैं। इसके अलावा पुराने पंचायत भवन को बेचने के आरोप को लेकर भी शिकायत किए जाने की बात कही गई है।
पंचों का आरोप है कि इन मामलों में भी अब तक प्रभावी जांच नहीं हुई है। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और जल्द जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।

