Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के दो नन्हे रोबोटिक्स चैंपियंस का कमाल, सियोल में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के दो नन्हे रोबोटिक्स चैंपियंस का कमाल, सियोल में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण है। राजधानी रायपुर के दो होनहार विद्यार्थियों ने देश की सबसे बड़ी रोबोटिक्स प्रतियोगिताओं में से एक रोबोटेक्स इंडिया नेशनल चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। वैदिक इंटरनेशनल स्कूल के 12 वर्षीय पाराक्रम सिन्हा और एन.एच. गोयल वर्ल्ड स्कूल के 9 वर्षीय धवल श्रीवास्तव ने रोबोनाइट रोबोटिक्स का प्रतिनिधित्व करते हुए लेगो लाइन फॉलोअर श्रेणी में यह उपलब्धि हासिल की। अब दोनों विद्यार्थी दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में आयोजित होने वाले रोबोटेक्स इंटरनेशनल ग्रैंड फिनाले में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के 16 से अधिक राज्यों के 7,000 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जबकि 500 से अधिक रोबोट विभिन्न रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रतियोगिताओं में उतारे गए। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच पाराक्रम और धवल ने अपनी तकनीकी दक्षता, बेहतरीन प्रोग्रामिंग, सटीक रोबोट डिज़ाइन और शानदार रणनीति के दम पर समग्र रूप से दूसरा स्थान हासिल किया।

चार वर्षों की मेहनत लाई रंग

दोनों विद्यार्थी पिछले चार वर्षों से रायपुर स्थित रोबोनाइट रोबोटिक्स में रोबोटिक्स, कोडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नियमित प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनकी सफलता लगातार अभ्यास, अनुशासित प्रशिक्षण, तकनीकी जिज्ञासा और मजबूत टीमवर्क का परिणाम मानी जा रही है।

दुनिया की सबसे बड़ी रोबोटिक्स प्रतियोगिताओं में शामिल है रोबोटेक्स

वर्ष 2001 में एस्टोनिया से शुरू हुई रोबोटेक्स प्रतियोगिता आज दुनिया के सबसे बड़े रोबोटिक्स और टेक्नोलॉजी महोत्सवों में शामिल है। इसका नेटवर्क 100 से अधिक देशों तक फैला हुआ है और हर साल आयोजित होने वाले इंटरनेशनल ग्रैंड फिनाले में हजारों युवा नवप्रवर्तक, विद्यार्थी, शिक्षक और तकनीकी विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं। भारत में आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप इसी वैश्विक प्रतियोगिता का आधिकारिक क्वालिफाइंग आयोजन है।

रवि सिन्हा बोले- यह चार साल की मेहनत का परिणाम

रोबोनाइट रोबोटिक्स के सह-संस्थापक रवि सिन्हा ने कहा कि यह उपलब्धि कुछ सप्ताह की तैयारी नहीं, बल्कि चार वर्षों की निरंतर सीखने, प्रयोग करने और चुनौतियों का सामना करने की यात्रा का परिणाम है। उन्होंने कहा कि रोबोटिक्स बच्चों में तकनीकी कौशल के साथ-साथ रचनात्मकता, समस्या-समाधान, कम्प्यूटेशनल सोच और टीमवर्क जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं का भी विकास करती है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए वैदिक इंटरनेशनल स्कूल, रिवरडेल वर्ल्ड स्कूल और एन.एच. गोयल वर्ल्ड स्कूल का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर

यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब छत्तीसगढ़ सरकार दक्षिण कोरिया के साथ प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत विनिर्माण, ऑटोमोबाइल और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में राज्य के दो युवा नवाचारियों का विश्व मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना छत्तीसगढ़ की उभरती तकनीकी क्षमता और युवा प्रतिभा का प्रतीक माना जा रहा है।

11 हजार से अधिक विद्यार्थियों को दे चुका है प्रशिक्षण

रायपुर स्थित रोबोनाइट रोबोटिक्स पिछले कई वर्षों से STEM शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है। संस्था अब तक 30 से अधिक शिक्षण संस्थानों के 11,000 से अधिक विद्यार्थियों को रोबोटिक्स, कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती तकनीकों का प्रशिक्षण दे चुकी है। संस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और भविष्य के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल विकसित करना है।

पाराक्रम सिन्हा और धवल श्रीवास्तव की यह सफलता केवल उनके परिवार, स्कूल और प्रशिक्षकों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई है। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण STEM शिक्षा और निरंतर मेहनत के बल पर प्रदेश के बच्चे वैश्विक मंच पर भी भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।


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