MP Bhopal News: भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में नेताओं की बयानबाजी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। अपनी ही सरकार और व्यवस्था के खिलाफ लगातार मुखर हो रहे भाजपा के तीन विधायकों पर अब पार्टी संगठन सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार विवादित बयानों से सरकार और संगठन की छवि को नुकसान पहुंचने पर प्रदेश नेतृत्व नाराज है और जल्द ही संबंधित विधायकों से जवाब-तलब किया जा सकता है।
तीन विधायकों को भोपाल बुलाने की तैयारी
जानकारी के मुताबिक भाजपा संगठन गुना विधायक पन्नालाल शाक्य, आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय और पिछोर विधायक प्रीतम लोधी के हालिया बयानों से असहज है। इन नेताओं द्वारा सरकार की कार्यप्रणाली और बिजली कटौती जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाने के बाद संगठन ने मामले को गंभीरता से लिया है।
सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इन तीनों विधायकों को भोपाल तलब कर स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। पार्टी नेतृत्व अनुशासनहीनता के मामलों पर सख्त कार्रवाई के मूड में दिखाई दे रहा है।
कप्तान सिंह सोलंकी ने दी बड़ी सीख
इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी का बयान चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सुधारने के लिए उसे पर्याप्त अवसर दिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमें यह भी देखना चाहिए कि एक पिता अपने बेटे को घर से निकालने के लिए कितना इंतजार करता है और उसे सुधारने के कितने मौके देता है। कई बार जमीनी स्तर की नाराजगी और भावनाओं के कारण ऐसे बयान सामने आते हैं।”
विचारधारा और अनुशासन सबसे जरूरी
कप्तान सिंह सोलंकी ने नाराज विधायकों को भी संदेश देते हुए कहा कि जनभावनाएं अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन पार्टी की विचारधारा और अनुशासन से समझौता नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि हर जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह अपनी वाणी पर संयम रखे और संगठन की मर्यादा का पालन करे।
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
भाजपा में चल रही अंदरूनी खींचतान पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अविनभ बारोलिया ने कहा कि कप्तान सिंह सोलंकी जैसे वरिष्ठ नेता की बातों को भाजपा को गंभीरता से लेना चाहिए।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “बीजेपी के विधायक खुद ही बीजेपी को नुकसान पहुंचाने में लगे हैं। उनके बयान पार्टी की अंदरूनी कलह और असंतोष को उजागर कर रहे हैं।”
संगठन की नजर, कार्रवाई पर सबकी निगाहें
फिलहाल भाजपा संगठन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी अपने विधायकों के खिलाफ केवल चेतावनी तक सीमित रहती है या फिर अनुशासनात्मक कार्रवाई का रास्ता अपनाती है। भाजपा के भीतर बढ़ती बयानबाजी और असंतोष को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है।

