CG News: पेंशनरों को बड़ी राहत: महंगाई राहत के लिए दोनों राज्यों की आपसी सहमति की बाध्यता खत्म, अब मिलेगा समय पर लाभ

CG News: पेंशनरों को बड़ी राहत: महंगाई राहत के लिए दोनों राज्यों की आपसी सहमति की बाध्यता खत्म, अब मिलेगा समय पर लाभ

Chhattisgarh Latest News: रायपुर। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों एवं परिवार पेंशनधारकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब महंगाई राहत (Dearness Relief) देने के लिए दोनों राज्य सरकारों की आपसी सहमति की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इस फैसले से दोनों राज्य अपने-अपने पेंशनरों को केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत महंगाई राहत के अनुरूप स्वतंत्र रूप से महंगाई राहत मंजूर कर सकेंगे।

भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के दुर्ग जिला अध्यक्ष बी.के. वर्मा ने इसे पेंशनरों के लंबे संघर्ष की ऐतिहासिक सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 49(6) के तहत अब तक महंगाई राहत जारी करने से पहले मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों की आपसी सहमति आवश्यक थी। इसी कारण पेंशनरों को नियमित कर्मचारियों की तुलना में महंगाई राहत मिलने में देरी होती थी, जबकि कर्मचारियों के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं थी।

बी.के. वर्मा ने बताया कि भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ पिछले सात वर्षों से इस व्यवस्था को समाप्त करने के लिए लगातार आंदोलन कर रहा था। इस दौरान पेंशनरों ने मंत्रालय का घेराव किया, विभिन्न स्तरों पर ज्ञापन सौंपे और दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना देकर अपनी मांग को प्रमुखता से उठाया।

महासंघ के लंबे संघर्ष के बाद मध्यप्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव, वित्त विभाग और छत्तीसगढ़ शासन के वित्त सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से 17 जुलाई 2026 को आदेश क्रमांक ई-1077487/2026/नियम/04/वित्त, भोपाल जारी किया गया। आदेश के अनुसार अब दोनों राज्य सरकारें अपने-अपने प्रदेश के पेंशनरों को केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत महंगाई राहत के अनुरूप स्वतंत्र रूप से महंगाई राहत स्वीकृत कर सकेंगी।

इस निर्णय पर भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के दुर्ग जिला अध्यक्ष बी.के. वर्मा, संभागीय अध्यक्ष बी.एल. गजपाल, महामंत्री पी.आर. साहू, उपाध्यक्ष एन.के. देशमुख, शालिक वर्मा, संगठन मंत्री बी.के. शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला दोनों राज्यों के लाखों पेंशनरों के हित में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम है।


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