Surajpur News: सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी कार्रवाई का इंतजार, जननी सुरक्षा योजना की राशि अटकी

Surajpur News: सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी कार्रवाई का इंतजार, जननी सुरक्षा योजना की राशि अटकी

Chhattisgarh Surajpur News: सूरजपुर: सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक मामला सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचने के बाद भी कार्रवाई के इंतजार में है। ग्राम भेण्ड्री, राजपुर निवासी गायत्री यादव ने 4 सितंबर 2026 को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत का टोकन नंबर CC260900176682 है। शिकायतकर्ता ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिलौटा में प्रसव के बाद जननी सुरक्षा योजना की राशि नहीं मिलने और प्रसव के दौरान बाहर से इंजेक्शन खरीदवाने का आरोप लगाया है।

3 अगस्त को हुआ था प्रसव

शिकायत के अनुसार गायत्री यादव का प्रसव 3 अगस्त 2026 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिलौटा, जिला सूरजपुर में हुआ था। प्रसव के बाद जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली राशि अब तक उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि योजना की राशि के संबंध में स्वास्थ्य केंद्र की स्टाफ नर्स भारती मिर्रे से जानकारी लेने पर उन्हें बताया गया कि जननी सुरक्षा योजना का फार्म मांगा ही नहीं गया है। फार्म मांगे जाने के बाद ही राशि मिलने की बात कही गई।

बाहर से इंजेक्शन खरीदने के लिए कहने का आरोप

शिकायत में प्रसव के दौरान स्वास्थ्य केंद्र से बाहर की दवा और इंजेक्शन खरीदवाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स भारती मिर्रे ने दवा उपलब्ध नहीं होने की बात कहते हुए प्राइवेट मेडिकल दुकान से इंजेक्शन खरीदकर लाने को कहा। आरोप है कि बाहर से इंजेक्शन लाने के बाद ही उसे लगाने की बात कही गई।

सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचा मामला

मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने 4 सितंबर को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद अब सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को लेकर उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता जानना चाहती हैं कि मामले की जांच किस अधिकारी ने की, संबंधित स्वास्थ्यकर्मी से क्या जवाब लिया गया और जननी सुरक्षा योजना की राशि अब तक लंबित क्यों है।

जांच और कार्रवाई का इंतजार

प्रसव के दौरान बाहर से इंजेक्शन खरीदवाने के आरोप की भी जांच की जरूरत है। यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।


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