नीट पेपर लीक पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, पूछा- ‘फेल शिक्षा मंत्री को कब हटाएंगे?’

नीट पेपर लीक पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, पूछा- ‘फेल शिक्षा मंत्री को कब हटाएंगे?’

Rahul Gandhi on NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 के पेपर लीक मामले ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और खासकर शिक्षा मंत्री की भूमिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि बार-बार परीक्षा व्यवस्था विफल होने के बावजूद शिक्षा मंत्री को अब तक पद से क्यों नहीं हटाया गया।

राहुल गांधी ने कहा कि साल 2024 में भी नीट परीक्षा का पेपर लीक हुआ था, लेकिन उस समय परीक्षा रद्द नहीं की गई और न ही किसी मंत्री ने जिम्मेदारी ली। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार सीबीआई जांच और नई समिति बनाकर मामले को दबाने की कोशिश की जाती है, लेकिन छात्रों को न्याय नहीं मिलता।

उन्होंने प्रधानमंत्री से तीन सीधे सवाल पूछे—

  • आखिर नीट का पेपर बार-बार कैसे लीक हो रहा है?
  • ‘परीक्षा पे चर्चा’ करने वाले प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं?
  • लगातार विफल हो रहे शिक्षा मंत्री को अब तक बर्खास्त क्यों नहीं किया गया?

राहुल गांधी ने कहा कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य दांव पर लगा है, लेकिन सरकार जवाबदेही तय करने से बच रही है।

रद्द हुई नीट यूजी 2026 परीक्षा

गौरतलब है कि नीट यूजी 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन परीक्षा से पहले ही पेपर लीक होने की खबर सामने आने के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी। अब लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी, जिससे छात्रों में भारी तनाव और नाराजगी है।

जल्द जारी होंगी नई तारीखें

एनटीए ने संकेत दिए हैं कि दोबारा होने वाली परीक्षा की नई तारीख और एडमिट कार्ड की जानकारी जल्द जारी की जाएगी। पहले से किए गए रजिस्ट्रेशन और परीक्षा केंद्रों को मान्य रखा जाएगा।

सीबीआई जांच जारी

पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है। अब तक दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक शिक्षक भी शामिल बताया जा रहा है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

इस पूरे मामले ने देश की शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि छात्र निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं।


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