पर्यावरण प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त: तीन बड़ी डिस्टिलरी के निरीक्षण के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त

पर्यावरण प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त: तीन बड़ी डिस्टिलरी के निरीक्षण के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त

High Court Takes Strict Stance on Environmental Pollution: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण, जल स्रोतों के दूषित होने और सुरक्षा उपायों के कमजोर क्रियान्वयन को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदेश की तीन बड़ी शराब डिस्टिलरी के स्वतंत्र निरीक्षण के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने अधिवक्ता वैभव शुक्ला और अपूर्वा त्रिपाठी को ‘कोर्ट कमिश्नर’ नियुक्त किया है। दोनों अधिवक्ता भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड का निरीक्षण करेंगे।

पर्यावरण मानकों के पालन पर कोर्ट की नजर

सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि पर्यावरणीय मानकों के पालन और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अदालत लगातार निगरानी कर रही है। कोर्ट ने माना कि मामले में स्वतंत्र तथ्यात्मक सत्यापन आवश्यक है।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि भाटिया वाइन मर्चेंट्स और छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज में किए गए निरीक्षण के दौरान परिसर के बाहर अनुपचारित अपशिष्ट जल का निर्वहन नहीं मिला। बोर्ड के मुताबिक, निगरानी प्रणाली के सभी मापदंड निर्धारित सीमा के भीतर पाए गए।

वेलकम डिस्टिलरीज पर गंभीर उल्लंघन के आरोप

वहीं वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ बोर्ड ने कई गंभीर अनियमितताओं की जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी में अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली निष्क्रिय पाई गई, दूषित पानी का निर्वहन हुआ, लैगून क्षतिग्रस्त मिले और उत्सर्जन तय सीमा से अधिक दर्ज किया गया। इसके अलावा ऑनलाइन निगरानी डेटा में भी विसंगतियां पाई गईं।

इन उल्लंघनों को देखते हुए नवंबर 2025 में कंपनी पर 54.60 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया था और बंद करने के निर्देश भी जारी किए गए थे।

30 दिनों में सौंपनी होगी रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने कोर्ट कमिश्नरों को निर्देश दिया है कि वे पर्यावरण बोर्ड के अधिकारियों के साथ संबंधित इकाइयों का निरीक्षण करें, कंपनियों के अनुपालन दावों का सत्यापन करें और 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।


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