Dr. Budhari Tati Padma Shri Award: बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ को पद्मश्री, 35 वर्षों की समाज सेवा का मिला राष्ट्रीय सम्मान, जानें इनके बारे में

Dr. Budhari Tati Padma Shri Award: बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ को पद्मश्री, 35 वर्षों की समाज सेवा का मिला राष्ट्रीय सम्मान, जानें इनके बारे में

Dr. Budhari Tati Padma Shri Award: नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में पिछले तीन दशकों से अधिक समय से समाज सेवा की अलख जगा रहीं समाज सेविका डॉ. बुधरी ताती को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति के हाथों यह सम्मान प्राप्त कर उन्होंने न केवल अपने जीवनभर के संघर्ष और सेवा कार्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई, बल्कि पूरे बस्तर और आदिवासी समाज का गौरव भी बढ़ाया है।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान डॉ. बुधरी ताती ने बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा धारण कर अपनी संस्कृति और जड़ों के प्रति गहरा सम्मान प्रदर्शित किया। आधुनिकता के दौर में अपनी पहचान और परंपरा को सहेजने का उनका यह संदेश देशभर में चर्चा का विषय बना।

15 वर्ष की उम्र में लिया समाज सेवा का संकल्प

डॉ. बुधरी ताती का समाज सेवा का सफर किशोरावस्था से ही शुरू हो गया था। वर्ष 1984-85 में गुरमगुंडा आश्रम के लखमू बाबा से प्रेरित होकर उन्होंने महज 15 वर्ष की उम्र में तय कर लिया था कि उनका जीवन समाज के लिए समर्पित रहेगा। परिवार को समझाने के बाद उन्होंने नागपुर स्थित अखिल भारतीय राष्ट्रीय सेवा समिति में प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर रायपुर होते हुए बस्तर लौटकर सेवा कार्यों में जुट गईं।

उस दौर में आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी आसान नहीं था। ऐसे समय में उन्होंने अशिक्षा, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान शुरू किया और धीरे-धीरे लोगों का विश्वास जीत लिया।

545 गांवों तक पैदल पहुंचकर जगाई जागरूकता

डॉ. बुधरी ताती ने अपने जीवन के 35 वर्ष बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम इलाकों को समर्पित कर दिए। वे अब तक 545 से अधिक गांवों तक पैदल पहुंच चुकी हैं। उन्होंने ग्रामीणों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझा और उन्हें समाधान की राह दिखाई।

बस्तर के कई गांवों में लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ‘बुआ’ और ‘बड़ी दीदी’ कहकर पुकारते हैं। यह संबोधन उनके और ग्रामीणों के बीच बने आत्मीय रिश्ते का प्रमाण है।

500 से अधिक महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

महिला सशक्तिकरण को अपने मिशन का केंद्र बनाते हुए उन्होंने 500 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया। महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, लघु उद्योग और स्वरोजगार के अन्य माध्यमों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया।

उनका मानना है कि यदि महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी तो परिवार और समाज दोनों मजबूत होंगे। उनके प्रयासों से अनेक महिलाओं ने रोजगार प्राप्त किया और आत्मविश्वास के साथ जीवन की नई शुरुआत की।

शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस

महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ डॉ. बुधरी ताती ने शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए। उन्होंने दूरस्थ गांवों में जाकर महिलाओं और बच्चों को स्वच्छता, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा विभिन्न बीमारियों से बचाव के बारे में जागरूक किया।

उन्होंने नशामुक्ति अभियान भी चलाया, जिसके सकारात्मक परिणाम कई गांवों में देखने को मिले। उनके प्रयासों से अनेक लोगों ने नशे की लत छोड़कर नया जीवन शुरू किया।

समाज सेवा के लिए नहीं की शादी

डॉ. बुधरी ताती ने अपना पूरा जीवन समाज को समर्पित कर दिया। उन्होंने विवाह नहीं करने का निर्णय लिया और समाज सेवा को ही अपना परिवार बना लिया। उनके लिए हर जरूरतमंद व्यक्ति परिवार का हिस्सा है और हर पीड़ित की सहायता करना उनका कर्तव्य।

जानलेवा हमलों और विरोध के बावजूद नहीं डिगा हौसला

समाज परिवर्तन की राह आसान नहीं थी। डॉ. बुधरी ताती को कई बार विरोध और जानलेवा परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ा। उन्होंने बताया कि एक बार अबूझमाड़ के एक गांव में काम के दौरान कुछ ग्रामीण धारदार हथियार लेकर उनके पीछे पड़ गए थे और स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी।

इसके बावजूद उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। उनका मानना है कि यदि वे डरकर रुक जातीं, तो हजारों लोगों तक जागरूकता और विकास की रोशनी नहीं पहुंच पाती।

वृद्धाश्रम और अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी भी संभाल रहीं

हिरानार में डॉ. बुधरी ताती ने एक वृद्धाश्रम की स्थापना की है, जहां बेसहारा बुजुर्गों को सम्मान और सहारा मिल रहा है। इसके अलावा वे गरीब और अनाथ आदिवासी बच्चों की शिक्षा, आवास और भविष्य की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। इस कार्य में उनकी भतीजी अन्ति वेक भी सक्रिय सहयोग कर रही हैं।

पद्मश्री बना जीवन का 23वां सम्मान

डॉ. बुधरी ताती को अब तक 22 विभिन्न सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें तीन राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार शामिल हैं। पद्मश्री उनके जीवन का 23वां सम्मान है, जिसे वे अपने व्यक्तिगत सम्मान से अधिक बस्तर की जनता और आदिवासी समाज का सम्मान मानती हैं।

पद्मश्री: देश का प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान

पद्मश्री भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इसकी शुरुआत वर्ष 1954 में हुई थी। यह सम्मान कला, साहित्य, शिक्षा, समाज सेवा, विज्ञान, चिकित्सा, खेल, लोक प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है।

डॉ. बुधरी ताती का यह सम्मान न केवल उनके समर्पण और संघर्ष की पहचान है, बल्कि उन हजारों महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों की उम्मीदों का भी सम्मान है, जिनके जीवन में उन्होंने सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है।


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