Chhattisgarh Bilaspur News : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल के सेवानिवृत्ति के अवसर पर बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के न्यायालय कक्ष में गरिमामय विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने न्यायमूर्ति अग्रवाल के न्यायिक जीवन, विधिक ज्ञान, निष्पक्षता और प्रशासनिक दक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति अग्रवाल ने हर मामले की सुनवाई धैर्य और निष्पक्षता के साथ की तथा अपने शांत और संतुलित व्यवहार से सभी के बीच अलग पहचान बनाई।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल ने न्यायिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए न्यायपालिका की गरिमा को हमेशा बनाए रखा। कानून के शासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और न्याय के मानवीय पक्ष के प्रति संवेदनशीलता युवा न्यायिक अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक है।
न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल 29 सितंबर 2016 को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए थे। इसके बाद 8 जनवरी 2018 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। करीब एक दशक के न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने एकलपीठ और युगलपीठ में मामलों की सुनवाई करते हुए 6300 से अधिक मामलों का निराकरण किया। इनमें एकलपीठ के 102 और युगलपीठ के 163 प्रकाशित निर्णय शामिल हैं।
न्यायमूर्ति अग्रवाल के महत्वपूर्ण फैसलों में मेसर्स बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड बनाम छत्तीसगढ़ राज्य व अन्य के मामले में दिया गया निर्णय उल्लेखनीय रहा। इसमें खनिज रियायत नियमों में केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से जुड़े प्रावधानों की महत्वपूर्ण व्याख्या की गई। इसके अलावा उर्मिला देवी बनाम विकास कुमार अग्रवाल मामले में भी उनका महत्वपूर्ण फैसला सामने आया।
विदाई समारोह में न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल ने ईश्वर, मुख्य न्यायाधीश, साथी न्यायाधीशों, परिवार, न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और हाई कोर्ट परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके न्यायिक जीवन में परिवार की विधिक विरासत का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके दादा क्षेत्र के प्रसिद्ध सिविल अधिवक्ता थे, जबकि उनके चाचा रवीश चंद्र अग्रवाल वरिष्ठ अधिवक्ता और अविभाजित मध्यप्रदेश के महाधिवक्ता रह चुके हैं।
समारोह में हाई कोर्ट के सभी न्यायाधीश, न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल के परिवारजन, महाधिवक्ता, राज्य विधिक परिषद के अध्यक्ष, हाई कोर्ट अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता, भारत सरकार के वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री एवं न्यायिक अकादमी के अधिकारी, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायिक अधिकारी तथा प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

