Bilaspur News : जमीन विवाद के बीच कोंडागांव में FIR, बुजुर्ग याचिकाकर्ता ने क्षेत्राधिकार पर उठाए सवाल

Bilaspur News : जमीन विवाद के बीच कोंडागांव में FIR, बुजुर्ग याचिकाकर्ता ने क्षेत्राधिकार पर उठाए सवाल

Chhattisgarh Bilaspur News : बिलासपुर। पंजाब के लुधियाना में कृषि भूमि से जुड़े विवाद के बीच कोंडागांव थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए 76 वर्षीय दिलबाग सिंह व अन्य ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मामला कथित तौर पर टेलीफोन पर हुई बातचीत से जुड़ा है, लेकिन एफआईआर में न तो कथित गाली-गलौज का स्पष्ट उल्लेख है और न ही धमकी से शिकायतकर्ता को वास्तविक भय या खतरा पैदा होने की बात सामने आती है। हाई कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और दूसरे प्रतिवादी को नोटिस जारी किया है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने 20 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता साजल कुमार गुप्ता ने पक्ष रखा। एफआईआर अपराध क्रमांक 0380/2025 कोंडागांव थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 और 351(3) के तहत दर्ज की गई है। आरोप 5 नवंबर 2025 को हुई कथित टेलीफोन बातचीत से संबंधित हैं।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार विवाद की मूल वजह पंजाब के लुधियाना जिले के गांव घराला की कृषि भूमि से जुड़ा मामला है। इस संबंध में सिविल कोर्ट में पहले से कार्यवाही चल रही है। पक्षकारों के बीच 2 नवंबर 2025 को थाना पायल, जिला लुधियाना में समझौता भी हुआ था। इसके बावजूद बाद में कोंडागांव थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।

याचिकाकर्ताओं ने एफआईआर दर्ज किए जाने के क्षेत्राधिकार पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि भूमि विवाद और उससे जुड़ी कानूनी कार्यवाही पंजाब में चल रही है, जबकि छत्तीसगढ़ में दर्ज मामला केवल टेलीफोन पर हुई कथित बातचीत पर आधारित है। ऐसे में कोंडागांव थाने में एफआईआर दर्ज किए जाने के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी गई है।

याचिका में एफआईआर दर्ज कराने में हुई देरी का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि आपसी विवाद और पारिवारिक रंजिश के चलते आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है। उनका तर्क है कि एफआईआर में लगाए गए आरोप प्रथमदृष्टया कथित अपराध के आवश्यक तत्वों को पूरा नहीं करते हैं।

याचिकाकर्ता पक्ष ने 76 वर्षीय दिलबाग सिंह की उम्र का हवाला देते हुए व्यक्तिगत स्वतंत्रता, गरिमा और प्रतिष्ठा के अधिकार की भी बात कही है। उनका कहना है कि ऐसे मामले में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

हाई कोर्ट ने फिलहाल एफआईआर रद्द नहीं की है। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस स्वीकार करने के लिए कहा है और दूसरे प्रतिवादी को भी नोटिस जारी किया है। राज्य की ओर से डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट सौम्य राय ने नोटिस स्वीकार किया। दूसरे प्रतिवादी को साधारण डाक और स्पीड पोस्ट के माध्यम से नोटिस भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

कोर्ट ने पीएफ सात दिन में जमा करने और सेवा रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। यानी इस स्तर पर हाई कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। एफआईआर रद्द होगी या नहीं, इस पर आगे की सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।


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