Chhattisgarh Bijapur News : बीजापुर। ग्राम मद्देड़ की रहने वाली 27 वर्षीय सुजाता रालाबंडी ने महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता को बचत में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की है। आंगनबाड़ी केंद्र मद्देड़-3 की हितग्राही सुजाता ने योजना से मिली 12 हजार रुपये की राशि जमा कर बर्तन, कड़ाही और बड़ा गैस चूल्हा खरीदा। इसके बाद उन्होंने सड़क किनारे छोटी-सी दुकान शुरू कर भजिया, अइरसा और सकनाल बेचने का व्यवसाय शुरू किया। आज इस व्यवसाय से उन्हें करीब 4 हजार रुपये प्रतिमाह की शुद्ध आय हो रही है।
सुजाता के पति महादेव रालाबंडी गांव से बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। सीमित आय में परिवार की जरूरतों के साथ दो छोटे बच्चों, जिनकी उम्र 7 और 4 वर्ष है, की परवरिश करना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में सुजाता ने महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली प्रतिमाह 1 हजार रुपये की सहायता राशि को खर्च करने के बजाय बचाना शुरू किया।
मार्च 2024 से मार्च 2025 तक मिली 12 किस्तों से उन्होंने कुल 12 हजार रुपये की बचत की। इसी राशि से व्यवसाय के लिए जरूरी बर्तन, कड़ाही और बड़ा गैस चूल्हा खरीदा। इसके बाद अगले पांच माह की किस्तों से बेसन, तेल और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदी। धीरे-धीरे उन्होंने सड़क किनारे एक छोटी-सी झोपड़ी तैयार कर अपना खाद्य व्यवसाय शुरू कर दिया।
आज सुजाता अपनी दुकान पर बस्तर के प्रसिद्ध स्थानीय व्यंजन भजिया, अइरसा और सकनाल तैयार कर बेचती हैं। छोटे स्तर से शुरू किया गया यह कारोबार अब उनके परिवार के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन गया है। इससे उन्हें करीब 4 हजार रुपये प्रतिमाह की शुद्ध आय हो रही है।
अपनी कमाई से सुजाता पति का आर्थिक सहयोग कर रही हैं। साथ ही दोनों बच्चों को निजी विद्यालय में पढ़ा रही हैं और भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। कभी परिवार की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली सुजाता अब अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक मजबूती में भागीदार बन गई हैं।
सुजाता का कहना है कि महतारी वंदन योजना की राशि उनके लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का अवसर है। उन्होंने बताया कि हर महीने मिलने वाली 1 हजार रुपये की राशि को बचाकर उन्होंने दुकान शुरू करने के लिए पूंजी तैयार की। उनके मुताबिक, इसी सहायता ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और बच्चों की शिक्षा के लिए बेहतर भविष्य बनाने का आत्मविश्वास दिया है।
सुजाता की कहानी बताती है कि सही अवसर और आर्थिक सहयोग मिलने पर महिलाएं अपनी मेहनत और सूझबूझ से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकती हैं। महतारी वंदन योजना से मिली राशि को उन्होंने खर्च करने के बजाय बचत और व्यवसाय की पूंजी में बदलकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अपनी भूमिका तय की है।

