रायपुर में 3 फर्जी कॉल सेंटर पर रेड, 40 गिरफ्तार, एप्पल-अमेज़न के कस्टमर केयर बनकर अमेरिकियों से ठगी

रायपुर में 3 फर्जी कॉल सेंटर पर रेड, 40 गिरफ्तार, एप्पल-अमेज़न के कस्टमर केयर बनकर अमेरिकियों से ठगी

Raipur Fake Call Center Busted रायपुर में पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच और रायपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने शहर में संचालित तीन फर्जी कॉल सेंटरों पर छापेमारी कर 40 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई शहर के गंज थाना क्षेत्र, राजेंद्र नगर और फाफाडीह इलाकों में की गई, जहां पॉश लोकेशनों पर फाइनेंस कंपनियों की आड़ में यह अवैध गतिविधियां चलाई जा रही थीं।

पुलिस जांच में सामने आया है कि इन कॉल सेंटरों के जरिए विदेशों, खासकर अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाया जाता था। गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था और पूरी ऑपरेशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित किया जा रहा था। आरोपी खुद को बड़ी कंपनियों के अधिकृत कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर लोगों का भरोसा जीतते थे और फिर उन्हें ठगी का शिकार बनाते थे।

जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि यह ठगी का नेटवर्क मुख्य रूप से रात के समय सक्रिय रहता था, ताकि अमेरिका और यूरोप के टाइम जोन के हिसाब से विदेशी नागरिकों से आसानी से संपर्क किया जा सके। पुलिस ने छापेमारी के दौरान 20 लैपटॉप, 50 डेस्कटॉप कंप्यूटर और 50 मोबाइल फोन सहित बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल इस साइबर फ्रॉड को अंजाम देने में किया जा रहा था।

गिरोह के सदस्य खुद को Apple और Amazon के कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बताकर विदेशी नागरिकों को कॉल करते थे। उन्होंने अपने फर्जी मोबाइल नंबर और संपर्क विवरण को इस तरह इंटरनेट पर सेट कर रखा था कि गूगल सर्च में ये सबसे ऊपर दिखाई दें। इसके बाद तकनीकी सहायता और अकाउंट से जुड़ी समस्याओं का डर दिखाकर लोगों से डॉलर में बड़ी रकम वसूली जाती थी।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में काम करने वाले कई युवक गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से लाए गए थे। इन्हें 15 से 20 हजार रुपये मासिक वेतन पर रखा गया था और इन्हें स्क्रिप्ट के जरिए लोगों से बात करने की ट्रेनिंग दी जाती थी।

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हुई है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि डेटा लीक का स्रोत क्या था और इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन किन-किन देशों तक फैले हुए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विदेशी एजेंसियों से भी संपर्क किए जाने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध के खिलाफ इस तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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