डही में ओवरलोड वाहनों में सफर को मजबूर मजदूर, हादसों के बाद भी नहीं जाग रहा प्रशासन

डही में ओवरलोड वाहनों में सफर को मजबूर मजदूर, हादसों के बाद भी नहीं जाग रहा प्रशासन

Overloaded Vehicles in Dahi News:डही (धार)। डही क्षेत्र से रोजी-रोटी के लिए बड़े पैमाने पर पलायन होता है। लेकिन पलायन के नाम पर मजदूरों को पिकअप, लोडिंग वाहनों और जीपों में ठूंस-ठूंसकर भेड़-बकरियों की तरह ले जाया जाता है। हालात ऐसे हो जाते हैं कि जब अंदर जगह पूरी भर जाती है तो मजदूर वाहनों की छत पर बैठकर और किनारों से लटककर सफर करते नजर आते हैं। इस तरह उन्हें मौत के साये में सफर करने को मजबूर किया जा रहा है।
इसी तरह शादी-ब्याह के सीजन में दुल्हन को लेने जाने वाले बाराती भी बसों और आयशर वाहनों की छतों पर बैठकर सफर कर रहे हैं। कुल मिलाकर वाहन संचालकों के साथ ही यात्री भी अपनी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

गुरुवार को ब्यावरा-राजगढ़ में बारातियों से भरी बस पलटने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि बुधवार को धार में पिकअप हादसे में 16 मजदूरों की जान चली गई। इन ताजा हादसों के बाद भी गुरुवार को क्षेत्र से कई पिकअप वाहनों में ठूंस-ठूंसकर मजदूरों को ले जाने का सिलसिला जारी रहा। आसपास हो रहे भीषण हादसों से भी कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है मानो यहां भी किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा हो।

ऐसा भी नहीं है कि डही क्षेत्र में पहले हादसे नहीं हुए हों। ग्राम चिचवान्या में 4 जुलाई 2021 को पिकअप वाहन पुलिया के नीचे गिर गया था, जिसमें 15 मजदूर घायल हो गए थे। वहीं 11 अगस्त 2021 को अमलाल-कलमानी रोड पर पिकअप की टक्कर से दो मासूम भाई-बहन की मौत हो गई थी। इसी तरह ग्राम बड़दा के एक दंपती और उनके पुत्र की भी पिकअप की टक्कर से मौत हो चुकी है। पिकअप वाहन खाली हों या भरे, सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ते हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना रहता है।

हमें लापरवाही नहीं, सुरक्षित सड़कें चाहिए
आदिवासी समाज संगठन के अध्यक्ष जेडी डावर ने कहा कि क्या डही क्षेत्र भी तिरला जैसे किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। यहां से रोजाना सुबह-शाम क्षमता से अधिक मजदूरों से भरे पिकअप वाहन निकलते हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि डही के मुख्य मार्गों पर तत्काल चेकिंग अभियान चलाया जाए और ओवरलोड व अवैध वाहनों को जब्त किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन तब न जागे जब लाशें बिछ जाएं, बल्कि समय रहते कदम उठाए जाएं, ताकि मासूमों की जान बचाई जा सके। हमें लापरवाही नहीं, बल्कि सुरक्षित सड़कें चाहिए।


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