US-Iran Talks: जेनेवा। स्विट्जरलैंड के जेनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता के दौरान अचानक तनाव बढ़ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सख्त चेतावनी ने बातचीत की दिशा बदल दी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान अपने सहयोगी संगठनों, विशेषकर हिजबुल्लाह, को नहीं रोकता है तो अमेरिका उस पर पिछले सप्ताह से भी बड़ा हमला करेगा। ट्रंप के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत मुश्किल दौर में पहुंच गई।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यदि ईरान ने हिजबुल्लाह की गतिविधियों को नियंत्रित नहीं किया तो अमेरिका और अधिक आक्रामक कार्रवाई करेगा। इस बयान के तुरंत बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। ईरानी संसद के स्पीकर और वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने कहा कि यदि अमेरिकी धमकियां प्रभावी होतीं तो वॉशिंगटन आज ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपने शब्दों में सावधानी बरतनी चाहिए और ईरानी सेना हर परिस्थिति का जवाब देने के लिए तैयार है।
सूत्रों के मुताबिक ट्रंप के बयान से नाराज ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी पक्ष के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कुछ समय के लिए बैठक कक्ष छोड़ दिया। हालांकि इससे पहले दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच लगभग 82 मिनट तक बातचीत हुई थी। पाकिस्तान और कतर के मध्यस्थों ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को मनाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती स्तर पर उन्हें सफलता नहीं मिली।
वार्ता के पहले चरण में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। ईरान ने अपनी विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों की वापसी और ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों में राहत की मांग रखी। ईरानी मीडिया के अनुसार अमेरिकी पक्ष के साथ तेल प्रतिबंधों में छूट को लेकर एक प्रारूप को अंतिम रूप दे दिया गया है और जल्द ही इसे लागू किया जा सकता है। समझौते के तहत कतर में फ्रीज किए गए लगभग 6 अरब डॉलर भी ईरान को वापस किए जाने की संभावना जताई गई है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने को तैयार है। दोनों पक्षों के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) में अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर व्यापक समझौते तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देगा।
दूसरी ओर, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि उनका देश दबाव, धमकी और अपमान के आगे नहीं झुकेगा तथा विकास और परमाणु तकनीक के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया को ईरान के इस अधिकार को स्वीकार करना होगा।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने ट्रंप के बयान को अपमानजनक बताते हुए कहा कि इससे वार्ता जटिल हो गई है। हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत पूरी तरह छोड़ने का संकेत नहीं दिया है और मध्यस्थ देशों के साथ संपर्क बनाए हुए है।
इसी बीच इजरायल ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सेना दक्षिणी लेबनान के ब्यू-फोर्ट किले वाले क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का अगला दौर निर्धारित समय पर हो पाएगा या ट्रंप के बयान के बाद पैदा हुई कड़वाहट इस पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार देगी।

