CG Gariaband News: गरियाबंद। किडनी बीमारी की समस्या को लेकर वर्षों से चर्चा में रहे गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा क्षेत्र के लोगों को जल्द ही स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के दौरान क्षेत्र का दौरा करते हुए तेल नदी पर 7 करोड़ रुपये की लागत से एनीकेट निर्माण को मंजूरी दे दी है। साथ ही अधिकारियों को बारिश से पहले परियोजना से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं।
जलजीवन मिशन के तहत तैयार हो रही बड़ी योजना
दरअसल, वर्ष 2024 में राज्य सरकार ने जलजीवन मिशन के अंतर्गत सामूहिक जलप्रदाय योजना के लिए 8 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। इस योजना के तहत तेल नदी से इंटेक वेल के माध्यम से पानी लेकर सुपेबेड़ा में स्थापित जल शोधन संयंत्र (ट्रीटमेंट प्लांट) में शुद्ध किया जाएगा।
इसके बाद 9 गांवों के 2074 परिवारों को आयरन और फ्लोराइड मुक्त स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है।
नदी में सालभर पानी बनाए रखना था सबसे बड़ी चुनौती
इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने सबसे बड़ी समस्या वर्षभर जल उपलब्धता की थी। योजना पूरी तरह सतही जल स्रोत (सर्फेस वाटर) पर आधारित है, जबकि तेल नदी में अक्टूबर के बाद जलस्तर काफी कम हो जाता है।
ऐसे में नदी में 12 महीने पानी बनाए रखने के लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से अब तेल नदी पर एनीकेट निर्माण की मंजूरी दी गई है, जिससे जल संग्रहण और जलापूर्ति दोनों सुनिश्चित हो सकेंगी।
पहले भी किया गया था प्रयास
जानकारी के अनुसार, दो वर्ष पहले इंटेक वेल के नीचे करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से डायफ्रॉम वॉल का निर्माण कराया गया था, लेकिन वह पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होकर बह गई थी। इसके बाद जलप्रदाय योजना को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
जनप्रतिनिधियों ने जताया आभार
एनीकेट निर्माण की स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इस फैसले से सुपेबेड़ा समेत आसपास के गांवों में वर्षों पुरानी स्वच्छ पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।
किडनी प्रभावित क्षेत्र को मिलेगी बड़ी राहत
सुपेबेड़ा क्षेत्र लंबे समय से दूषित पानी और किडनी रोग की समस्या को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। ऐसे में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में यह कदम क्षेत्र के हजारों लोगों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

