Chhattisgarh Raipur News : रायपुर। अम्लीडीह इलाके में खुले नाले में गिरने से 5 साल के मासूम काव्यांश की मौत के बाद रायपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और शहर की सभी खुली नालियों को 15 दिनों के भीतर ढकने की मांग की है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक अम्लीडीह में नाले का काम अधूरा पड़ा था और खुले हिस्से के कारण पहले से ही खतरा बना हुआ था। लोगों का दावा है कि नाले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक शिकायतें भी पहुंचाई गई थीं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसी खुले नाले में गिरने से मासूम काव्यांश की जान चली गई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने बच्चे की मौत पर संवेदना व्यक्त करते हुए घटना को महज हादसा मानने से इनकार किया। तिवारी ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते नाले को सुरक्षित कर दिया जाता तो मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
आकाश तिवारी ने नगर निगम और जिला प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने मामले की तत्काल जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और रायपुर शहर की सभी खुली नालियों को 15 दिनों के भीतर ढकने की मांग की। उन्होंने कहा कि शहर में खुले नाले और गड्ढे लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं।
तिवारी ने रायपुर में हाल में सामने आए अन्य हादसों का भी जिक्र किया। उन्होंने हीरापुर-जरवाए में मकान के गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत और रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में दो सफाई कर्मचारियों की मौत के मामलों को उठाते हुए शहर की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
वहीं महापौर मीनल चौबे ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू किया और बच्चे के शव को बाहर निकाला। महापौर ने माना कि खुले नाले की वजह से समस्या हो रही है। उन्होंने कहा कि जान से बड़ी कोई चीज नहीं है, लेकिन नालियों को पूरी तरह ढकने से सफाई में परेशानी और नाली जाम होने की स्थिति भी बन सकती है। इस समस्या का समाधान निकालने पर आगे विचार किया जाएगा।
पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग के बीच महापौर मीनल चौबे ने कहा कि नगर निगम की ओर से मुआवजा दिया जा सकता है या नहीं, इसकी जानकारी लेकर अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। वहीं नगर निगम कमिश्नर संबित मिश्रा ने कहा कि नगर निगम में मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है और मुआवजा राजस्व विभाग के माध्यम से दिया जाता है। उन्होंने मामले में शिकायत प्रतिवेदन मिलने के बाद जांच और आगे की कार्रवाई की बात कही।
काव्यांश की मौत के बाद शहर में खुले नालों, अधूरे ड्रेनेज सिस्टम और गड्ढों को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। बरसात के दौरान जलभराव के कारण ऐसे स्थानों का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए नगर निगम को ऐसे खतरनाक स्थानों की पहचान कर तत्काल उन्हें सुरक्षित करना चाहिए।
हादसे ने रायपुर के विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। शहर में स्मार्ट सिटी और बड़े विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में सुरक्षित ड्रेनेज और ढकी हुई नालियां अब भी चुनौती बनी हुई हैं।
अब सवाल यह है कि काव्यांश की मौत के बाद क्या नगर निगम खुले नालों और खतरनाक गड्ढों को लेकर स्थायी कदम उठाएगा, पहले की शिकायतों की जांच होगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी। एक मासूम की मौत ने व्यवस्था के सामने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि किसी और बच्चे की जान जाने का इंतजार किए बिना शहर को सुरक्षित कब बनाया जाएगा।

