Raipur News: ‘हर फाइल का अलग रेट’, रायपुर नगर निगम में 30 से 40 प्रतिशत तक कमीशन मांगने का आरोप

Raipur News: ‘हर फाइल का अलग रेट’, रायपुर नगर निगम में 30 से 40 प्रतिशत तक कमीशन मांगने का आरोप

Raipur News: रायपुर। रायपुर नगर निगम में लंबे समय से लंबित भुगतान, कथित कमीशनखोरी और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सोमवार को सिविल ठेकेदारों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। नगर निगम के ठेकेदारों ने काम बंद कर निगम मुख्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और ढोल-ताशे बजाकर अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे ठेकेदारों का आरोप है कि बिना कथित कमीशन दिए उनकी फाइलें आगे नहीं बढ़ाई जातीं और करोड़ों रुपये का भुगतान महीनों से लेकर डेढ़ साल तक लंबित रखा गया है।

ठेकेदारों का कहना है कि नगर निगम में विकास कार्य कराने वाले अधिकांश ठेकेदार बैंक से ऋण लेकर या अपनी निजी संपत्ति गिरवी रखकर काम करते हैं। लेकिन समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण वे भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उनका दावा है कि निगम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है, जबकि बैंक का ब्याज लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि भुगतान रोककर रखने से ठेकेदार आर्थिक रूप से टूट रहे हैं और कई लोग कर्ज के जाल में फंस चुके हैं।

‘हर फाइल का अलग रेट’, 30 से 40 प्रतिशत तक कमीशन मांगने का आरोप

प्रदर्शन के दौरान ठेकेदारों ने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भुगतान की हर फाइल का अलग-अलग “रेट” तय है। उनका दावा है कि 18 प्रतिशत जीएसटी, 5 प्रतिशत सिक्योरिटी राशि और अन्य वैधानिक कटौतियों के बाद भी 30 से 40 प्रतिशत तक अतिरिक्त कमीशन मांगा जाता है। ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि अधिकारी, जोन स्तर के जिम्मेदार लोग और कुछ जनप्रतिनिधि अपना-अपना हिस्सा तय कर चुके हैं। बिना कथित कमीशन दिए भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती और फाइलें महीनों तक दफ्तरों में पड़ी रहती हैं।

बेगारी कराने और बाद में पेनल्टी लगाने का आरोप

ठेकेदारों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों द्वारा बिना भुगतान के अतिरिक्त कार्य कराने का दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि अधिकारियों के निजी या अतिरिक्त निर्देशों के कारण निर्धारित समय पर काम पूरा करना मुश्किल हो जाता है। इसके बाद देरी का पूरा दोष ठेकेदारों पर डालकर पेनल्टी लगा दी जाती है। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि समय से पहले काम पूरा करने पर कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता तो केवल दंडात्मक कार्रवाई क्यों की जाती है।

गुणवत्ता पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप

प्रदर्शन के दौरान ठेकेदारों ने यह भी कहा कि कथित कमीशन लेने के बाद कई बार गुणवत्ताहीन कार्यों को भी अधिकारियों द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन बाद में जब शिकायत होती है या जांच बैठती है तो पूरी जिम्मेदारी ठेकेदारों पर डाल दी जाती है। उनका कहना है कि यदि विकास कार्यों में भ्रष्टाचार होगा तो गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है, लेकिन दोष केवल ठेकेदारों पर मढ़ना उचित नहीं है।

ठेकेदार ने अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन में शामिल एक ठेकेदार ने आरोप लगाया कि जोन-7 के एक अधिकारी ने उन्हें लगभग पांच लाख रुपये का सामान खरीदने के लिए मजबूर किया, जो बाद में चोरी का निकला। इसके कारण उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा और सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई। उन्होंने दावा किया कि उनके डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पिछले एक वर्ष से लंबित है। कई बार आवेदन देने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि अलग-अलग स्तर के अधिकारियों के लिए 50 हजार से एक लाख रुपये तक की कथित मांग की जाती है।

‘कमिश्नर के आने के बाद हालात और बिगड़े’

सिविल ठेकेदार संघ के अध्यक्ष दुर्गेश ने कहा कि नगर निगम में कथित रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी कोई नई बात नहीं है, लेकिन वर्तमान निगम प्रशासन में स्थिति और अधिक खराब हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के ऑडिटर कार्यालय के बाहर तक यह लिखा रहता है कि ठेकेदार उनसे न मिलें। ऐसे में ठेकेदार अपनी समस्याएं लेकर आखिर किसके पास जाएं? उन्होंने कहा कि कई बार फाइलें गायब हो जाती हैं और महीनों तक उनका पता नहीं चलता। अपने ही मेहनत के पैसे के लिए ठेकेदारों को अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

पहले भी हो चुके हैं प्रदर्शन

यह पहला अवसर नहीं है जब नगर निगम के खिलाफ ठेकेदार सड़क पर उतरे हों। इससे पहले भी सफाई ठेकेदार बकाया भुगतान को लेकर हड़ताल कर चुके हैं, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी। इसके अलावा पानी टैंकर टेंडर, जमीन से जुड़ी फाइलों के गायब होने और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

सरकार से स्वतंत्र जांच और तत्काल भुगतान की मांग

सिविल ठेकेदार संघ ने नगरीय प्रशासन मंत्री और छत्तीसगढ़ सरकार से पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। संघ का कहना है कि लंबित भुगतान जल्द जारी किया जाए, कथित भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। संघ का मानना है कि इससे ठेकेदारों का विश्वास बहाल होगा और विकास कार्य भी सुचारु रूप से आगे बढ़ सकेंगे।

निगम प्रशासन का पक्ष नहीं आया सामने

इस मामले में महापौर मीनल चौबे और नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।


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