Chhattisgarh Surajpur News: सूरजपुर। विकासखंड के ग्राम सरनापारा में निर्माणाधीन एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) में कथित भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और तकनीकी अनियमितताओं के आरोपों ने प्रशासन को हरकत में ला दिया है। मीडिया में लगातार सामने आ रही खबरों और विभिन्न स्तरों पर की गई शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर के निर्देश पर सात सदस्यीय जांच समिति गठित की है। गुरुवार को समिति ने निर्माण स्थल पहुंचकर कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया और गुणवत्ता संबंधी पहलुओं की गहन जांच शुरू कर दी।
जांच दल का नेतृत्व अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ललिता भगत कर रही हैं। उनके साथ लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, विद्युत विभाग, पुलिस प्रशासन, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत के अधिकारी भी मौजूद रहे। टीम ने विद्यालय परिसर के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण कर निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और सुरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण किया।
प्रथम दृष्टया सही मिले कई आरोप
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान शिकायतों में लगाए गए कई आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। निरीक्षण में कई स्थानों पर तकनीकी मानकों की अनदेखी, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन में कमी के संकेत मिले हैं। जांच समिति ने निर्माण एजेंसी से माप पुस्तिका (एमबी), गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, तकनीकी स्वीकृतियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी तलब किए हैं।
करोड़ों की परियोजना पर उठे भ्रष्टाचार के आरोप
शिकायतकर्ता चंद्रिका कुशवाहा और मनीष गुप्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव, सरगुजा संभाग आयुक्त और जिला प्रशासन को भेजी शिकायत में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे विद्यालय में व्यापक भ्रष्टाचार और तकनीकी अनियमितताओं का आरोप लगाया था।
शिकायत के अनुसार भवन निर्माण में कई स्थानों पर बिना मानक बेस तैयार किए ढलाई की गई। लोहे के सपोर्ट की जगह बांस और लकड़ी का उपयोग किया गया, जाली बांधने में निर्धारित दूरी का पालन नहीं किया गया तथा निम्न गुणवत्ता वाले सरियों का इस्तेमाल किया गया। इन आरोपों की सत्यता की जांच अब प्रशासनिक स्तर पर की जा रही है।
मजदूरों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान निर्माण स्थल पर कार्यरत कई मजदूर बिना हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के काम करते मिले। इससे श्रमिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच समिति निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही रेत के स्रोत की भी जांच कर रही है। शिकायत में अवैध उत्खनन से प्राप्त रेत के उपयोग का आरोप लगाया गया था।
विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला
यह विद्यालय भविष्य में सैकड़ों आदिवासी छात्र-छात्राओं के आवास और शिक्षा का केंद्र बनेगा। ऐसे में यदि निर्माण गुणवत्ता से समझौता किया गया है तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। इसी वजह से प्रशासन जांच में कोई कोताही नहीं बरत रहा है।
तीन दिन में मांगी गई रिपोर्ट
कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार जांच समिति को तीन दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करना है। पूरे जिले की नजर अब इस रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि जांच में शिकायतों की पुष्टि होती है तो संबंधित ठेकेदार, तकनीकी अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल सरनापारा स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय निर्माण कार्य जिले में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। प्रशासन की सक्रियता ने संकेत दे दिए हैं कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना में कथित अनियमितताओं के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है और आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

