CG Surajpur Pratappur News: प्रतापपुर। ग्राम पंचायत बड़वार में मनरेगा कार्यों में जेसीबी मशीनों के कथित उपयोग और मजदूरों के अधिकारों के हनन को लेकर प्रकाशित समाचार का बड़ा असर देखने को मिला है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत प्रतापपुर ने ग्राम रोजगार सहायक रामकुमार (बीएफटी) को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर जनपद पंचायत कार्यालय में संलग्न कर दिया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले में जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी श्रम आधारित योजना में यदि मशीनों का इस्तेमाल हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं हो सकती। उनका तर्क है कि निर्माण कार्यों की निगरानी, मापन, सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया में कई स्तरों पर अधिकारी एवं तकनीकी अमला शामिल रहता है। ऐसे में पूरे मामले की व्यापक जांच आवश्यक है।
जांच पूरी होने से पहले कार्रवाई पर चर्चा
जनपद पंचायत द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि शिकायत की जांच अभी प्रक्रियाधीन है। इसके बावजूद रोजगार सहायक को कार्यमुक्त किए जाने की कार्रवाई ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताओं के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। उनका मानना है कि यदि मशीनों का उपयोग हुआ है तो कार्य का तकनीकी परीक्षण, मापन और भुगतान किन अधिकारियों की निगरानी में हुआ, इसकी भी निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए।
निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनिल कुमार तिवारी ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी समाचार प्रकाशित होने के बाद मिली।
इस बयान के बाद स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मीडिया के माध्यम से कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आ सकती है, तो योजनाओं की निगरानी के लिए बनाए गए प्रशासनिक तंत्र को भी समय रहते इसकी जानकारी होनी चाहिए थी।
सभी जिम्मेदार पक्षों की भूमिका जांचने की मांग
ग्रामीणों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि जांच केवल एक कर्मचारी तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित सभी अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
लोगों का कहना है कि मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है। यदि मशीनों के जरिए कार्य कराए गए हैं तो यह योजना की मूल भावना के विपरीत है और इससे मजदूरों के रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
बड़वार का मामला अब केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन, निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल क्षेत्रवासियों की नजर चल रही जांच पर टिकी हुई है।
अब देखना होगा कि जांच का दायरा कितना व्यापक होता है, क्या सभी जिम्मेदार पक्षों की भूमिका सामने आती है और प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच के जरिए पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होगी।

