MP Damoh News: दमोह। दमोह कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई उस समय भावुक हो गई, जब ग्राम सुनपुरा के छोटे-छोटे स्कूली बच्चे अपने गांव की बदहाल सड़क की शिकायत लेकर सीधे कलेक्टर के सामने पहुंच गए। हाथों में आवेदन लिए इन मासूम बच्चों ने प्रशासन को बताया कि स्कूल जाने के लिए उन्हें रोजाना कीचड़, गहरे गड्ढों और जलभराव से भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है, जिससे हर दिन हादसे का डर बना रहता है।
बच्चों ने कलेक्टर को बताया कि ग्राम सुनपुरा, ग्राम पंचायत नौनपानी के अंतर्गत आता है। गांव तक पहुंचने वाली मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत वर्ष 2017 में बनाई गई सड़क आज पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाता है। ऐसे में स्कूल पहुंचना बच्चों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं और उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कलेक्टर ने तत्काल दिए कार्रवाई के निर्देश
जनसुनवाई में बच्चों की समस्या सुनने के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल जनपद पंचायत दमोह के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कलेक्टर के निर्देश मिलते ही जनपद पंचायत की विभागीय टीम गांव पहुंची और सड़क का निरीक्षण किया। इसके बाद सड़क के सुधार कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
स्कूली बच्चों ने बताई सड़क की बदहाली
स्कूली बच्चों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में बताया गया कि सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। सड़क के दोनों ओर कंटीली झाड़ियां और बबूल के बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं, जिससे वाहन निकालना भी जोखिम भरा हो गया है। बच्चों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क का सुधार नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
मुख्य पहुंच मार्ग भी अतिक्रमण की चपेट में
स्कूली बच्चों ने आवेदन में यह भी बताया कि सुनपुरा तक पहुंचने वाला दूसरा मुख्य मार्ग भी अतिक्रमण की चपेट में है। अतिक्रमण के कारण सड़क संकरी और क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे गांव तक आवागमन लगातार प्रभावित हो रहा है। बरसात के दिनों में हालात और अधिक खराब हो जाते हैं।
स्कूली बच्चों की प्रमुख मांगें
स्कूली बच्चों ने प्रशासन से मांग की है कि वर्ष 2017 में बनी मुख्यमंत्री सड़क का तत्काल मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कराया जाए। इसके साथ ही सड़क किनारे उगी झाड़ियों और बबूल के पेड़ों की सफाई कराई जाए तथा गांव के मुख्य पहुंच मार्ग से अतिक्रमण हटाकर उसे सुगम बनाया जाए, ताकि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
मासूमों की गुहार पर टिकीं उम्मीदें
गांव के बच्चों का कहना है कि वे रोजाना पढ़ाई के लिए जोखिम उठाकर स्कूल जाते हैं, लेकिन खराब सड़क उनकी सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। ऐसे में अब ग्रामीणों और बच्चों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि जनसुनवाई में उठी मासूमों की यह आवाज केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क की तस्वीर भी जल्द बदलेगी और गांव के बच्चों को सुरक्षित रास्ता मिल सकेगा।


