Chhattisgarh Hasoud News : हसौद। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक भोजली पर्व हसौद में इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। भोजली विसर्जन के अवसर पर गांव की गलियां पारंपरिक गीतों, देवी-गंगा गीतों और डीजे की धुनों से गूंज उठीं। बारिश के बीच भी पर्व को लेकर ग्रामीणों का उत्साह कम नहीं हुआ। महिलाएं और ग्रामीण नाचते-गाते अपने-अपने घरों से भोजली लेकर मां महामाया मंदिर पहुंचे।
भोजली लेकर निकली महिलाओं और ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बन रहा था। गांव की अलग-अलग गलियों से टोली के रूप में लोग पारंपरिक गीत गाते और नृत्य करते हुए मां महामाया मंदिर पहुंचे। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने आयोजन में हिस्सा लिया।
मंदिर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने मां महामाया की परिक्रमा की और सामूहिक रूप से मंगल आरती की। इस दौरान ग्राम पंचायत की सरपंच अनुसूया बंजारे एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा मंगल आरती की गई। ग्रामीणों ने मां महामाया से गांव में सुख-शांति, अच्छी बारिश, बेहतर फसल, खेती में समृद्धि और सभी परिवारों की खुशहाली की कामना की।
पूजा-अर्चना और मंगल आरती के बाद ग्रामीण भोजली लेकर मां महामाया मंदिर के समीप स्थित तालाब पहुंचे। यहां पारंपरिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ भोजली को जल में ठंडा कर विसर्जित किया गया। विसर्जन के दौरान भी ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। बारिश के बावजूद महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण बड़ी संख्या में तालाब परिसर में मौजूद रहे। पारंपरिक गीतों और जयकारों के बीच भोजली विसर्जन का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
भोजली विसर्जन के बाद ग्रामीण अपने साथ थोड़ी-थोड़ी भोजली घर लेकर गए। ग्रामीण मान्यता के अनुसार भोजली को घर के मुख्य द्वार पर रखने से सुख-शांति बनी रहती है और घर में सकारात्मक वातावरण रहता है। जो लोग किसी कारणवश भोजली विसर्जन में शामिल नहीं हो पाते, उनके घर भी भोजली पहुंचाकर उन्हें इस परंपरा में शामिल किया जाता है। यही परंपरा भोजली पर्व को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखती, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता को भी मजबूत करती है।
मां महामाया मंदिर परिसर में उत्कृष्ट भोजली जगाने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। आयोजन के दौरान पांच महिलाओं को उत्कृष्ट भोजली के लिए नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रथम पुरस्कार खुश्बू साहू को 1,500 रुपये, द्वितीय पुरस्कार मनटोरी साहू को 1,000 रुपये, तृतीय पुरस्कार बुधयारीन पटेल को 700 रुपये, चतुर्थ पुरस्कार सुनीता पटेल को 500 रुपये और पंचम पुरस्कार छबि पटेल को 500 रुपये प्रदान किए गए। इसके अलावा अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति में भोजली पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। भोजली को हरियाली, अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। महिलाएं अनाज के बीजों को भोजली के रूप में अंकुरित कर कई दिनों तक उसकी सेवा और पूजा करती हैं। विसर्जन के अवसर पर अच्छी बारिश, बेहतर फसल, परिवार की खुशहाली और गांव की समृद्धि की कामना की जाती है।
हसौद में आयोजित भोजली पर्व ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा, संस्कृति और ग्रामीणों की आपसी एकता की खूबसूरत तस्वीर प्रस्तुत की। बारिश के बावजूद जिस उत्साह के साथ ग्रामीणों ने पर्व में भाग लिया, वह भोजली के प्रति लोगों की गहरी आस्था और परंपरा के प्रति जुड़ाव को दर्शाता है।
कार्यक्रम में ग्राम पंचायत सरपंच अनुसुइया बंजारे, सरपंच प्रतिनिधि कैलास बंजारे, उपसरपंच प्रतिनिधि शिवम जायसवाल, पूर्व उपसरपंच बल्लू जायसवाल, बीडीसी विजय केशी, पंचगण, जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक उपस्थित रहे।

