Gold-Silver Rate: नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं के भाव दबाव में नजर आए। खासतौर पर चांदी की कीमत में एक ही दिन में 6,000 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना करीब 2,000 रुपये तक सस्ता हो गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति निवेशकों के लिए खरीदारी का बेहतर अवसर बन सकती है।
MCX पर लुढ़के सोना-चांदी के भाव
सोमवार सुबह MCX पर 10 ग्राम सोने का भाव लगभग 1.54 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में करीब 2,000 रुपये कम रहा। वहीं चांदी की कीमत में भारी गिरावट देखने को मिली और इसका भाव लगभग 2.41 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गया।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई कमजोरी और निवेशकों की रणनीति में बदलाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
वैश्विक बाजार में भी दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। स्पॉट गोल्ड लगभग 4,321 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता देखा गया। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी कमजोरी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का रुझान फिलहाल कमजोर पड़ा है। इसके चलते सोने की कीमतें कई सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गई हैं।
क्यों गिर रहे हैं सोने और चांदी के दाम?
1. अमेरिकी रोजगार आंकड़ों का असर
अमेरिका से जारी मजबूत रोजगार आंकड़ों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों की मांग को कम कर देती हैं।
2. निवेशकों की बदली रणनीति
ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम होने के कारण निवेशक फिलहाल अन्य निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका असर सोने और चांदी की मांग पर पड़ा है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है।
3. तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई की चिंता
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका है। ऐसे में कई केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं, जिसका प्रभाव कीमती धातुओं के बाजार पर भी पड़ रहा है।
निवेशकों के लिए अवसर
बाजार जानकारों का मानना है कि कीमतों में आई यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर साबित हो सकती है। हालांकि निवेश से पहले बाजार की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर नजर रखना जरूरी होगा।

