Raipur News: नकटी गांव के विस्थापितों का रायपुर कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन धरना, कांग्रेस भी उतरी समर्थन में; बृजमोहन की पुरानी चिट्ठी वायरल

Raipur News: नकटी गांव के विस्थापितों का रायपुर कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन धरना, कांग्रेस भी उतरी समर्थन में; बृजमोहन की पुरानी चिट्ठी वायरल

Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव के विस्थापित परिवारों का विरोध प्रदर्शन एक बार फिर तेज हो गया है। शुक्रवार को प्रभावित ग्रामीण रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने भी हिस्सा लिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे जेल भरो आंदोलन भी शुरू करेंगे।

इससे पहले विस्थापित परिवार अपने टूटे हुए मकानों के बीच बारिश और कीचड़ में धरने पर बैठे थे। नकटी गांव में 80 मकानों पर बुलडोजर चलने के बाद से लोगों का विरोध लगातार जारी है। गुरुवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।

वहीं रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि रात के अंधेरे में घर तोड़ने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे आज भी ग्रामीणों के साथ खड़े हैं।

प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के तहत आवास उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि सभी परिवारों को मकान नहीं मिले हैं। जिन लोगों को आवास मिला है, उनका कहना है कि मकान छोटे हैं और उनमें पानी, बिजली तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिससे परिवारों का रहना मुश्किल हो रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई से दो दिन पहले वे सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिले थे। उस समय सांसद ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि बरसात के दौरान कोई तोड़फोड़ नहीं होगी और प्रशासन व ग्रामीणों के बीच समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। इसके बावजूद 29 जून को प्रशासन ने गांव में 80 मकानों पर बुलडोजर चला दिया।

इस बीच नकटी गांव को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखी करीब एक साल पुरानी चिट्ठी भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। पत्र में उन्होंने विधायक कॉलोनी के लिए जमीन चयन पर आपत्ति जताते हुए लिखा था कि गरीब परिवारों को हटाना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं होगा। अब इस पत्र के सामने आने के बाद नकटी गांव का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।


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