Digital Attendance Controversy: छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी पर विवाद: VSK ऐप से अटेंडेंस पर वेतन का नियम बना विरोध की वजह

Digital Attendance Controversy: छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी पर विवाद: VSK ऐप से अटेंडेंस पर वेतन का नियम बना विरोध की वजह

Digital Attendance Controversy: रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए VSK ऐप आधारित ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम लागू किया है। नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को स्कूल पहुंचते ही ऐप पर पंच-इन और छुट्टी के समय पंच-आउट करना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इसी डिजिटल उपस्थिति के आधार पर शिक्षकों का वेतन जारी किया जाएगा।

हालांकि, नई व्यवस्था लागू होते ही इसका विरोध शुरू हो गया है। प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने ऐप की तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए इसे अव्यावहारिक बताया है और चेतावनी दी है कि यदि ऐप के आधार पर वेतन कटौती की गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई बहस

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दूरस्थ क्षेत्र के शिक्षक उफनती नदी को नाव से पार कर स्कूल पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में शिक्षक सवाल उठा रहे हैं कि जब स्कूल तक पहुंचना ही चुनौतीपूर्ण है, तब नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं के बीच VSK ऐप पर समय पर उपस्थिति दर्ज करना कैसे संभव होगा।

शिक्षक बोले- सिस्टम की गलती की सजा क्यों?

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है कि शिक्षक नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर पढ़ाई करा रहे हैं, लेकिन ऐप की तकनीकी दिक्कतों के कारण उनकी उपस्थिति सही तरीके से रिकॉर्ड नहीं हो रही है। ऐसे में सिस्टम की कमी का दंड शिक्षकों को देना उचित नहीं है।

GPS और नेटवर्क की समस्या बनी बड़ी चुनौती

शिक्षक संगठनों का कहना है कि VSK ऐप कई क्षेत्रों में स्कूल की GPS लोकेशन सही तरीके से ट्रैक नहीं कर पा रहा है। इसके अलावा कमजोर इंटरनेट नेटवर्क, सर्वर डाउन होना, लॉगिन में परेशानी, ऐप का हैंग होना और समय पर चेक-इन तथा चेक-आउट दर्ज नहीं होना जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। दो पालियों में संचालित स्कूलों में भी यही दिक्कतें बताई जा रही हैं।

83 प्रतिशत अटेंडेंस के दावे पर सवाल

शिक्षा विभाग का दावा है कि करीब 83 प्रतिशत शिक्षक VSK ऐप के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। हालांकि शिक्षक संगठनों का कहना है कि कभी-कभार उपस्थिति दर्ज होना और पूरे महीने नियमित एवं त्रुटिरहित रिकॉर्ड उपलब्ध होना अलग बात है।

संगठनों ने सवाल उठाया है कि क्या विभाग यह प्रमाणित कर सकता है कि जुलाई महीने में 83 प्रतिशत शिक्षकों की प्रतिदिन सुबह से शाम तक की उपस्थिति बिना किसी तकनीकी बाधा के ऐप में दर्ज हुई है।

मैनुअल अटेंडेंस को भी मिले मान्यता

शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि जब तक VSK ऐप पूरी तरह तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हो जाता, तब तक स्कूलों में प्राचार्य और प्रधान पाठक द्वारा संधारित उपस्थिति रजिस्टर को भी वैध रिकॉर्ड माना जाए। उनका कहना है कि यदि शिक्षक स्कूल में मौजूद रहा है और उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर किए हैं, तो केवल ऐप में रिकॉर्ड दर्ज नहीं होने के कारण उसका वेतन नहीं रोका जाना चाहिए।

बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करने की मांग

संगठनों का कहना है कि यदि सरकार पूरी तरह डिजिटल अटेंडेंस लागू करना चाहती है, तो सभी स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीनें उपलब्ध कराई जाएं। केवल मोबाइल ऐप के भरोसे उपस्थिति दर्ज करना दूरस्थ और कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में व्यवहारिक नहीं है।

आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि VSK ऐप के आधार पर शिक्षकों के वेतन में कटौती की गई तो 7 अगस्त को प्रदेशभर के डीडीओ कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। वहीं छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने भी कहा है कि यदि शिक्षकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई तो संगठन सीएम हाउस घेराव सहित व्यापक आंदोलन करेगा।

अब शिक्षा विभाग के फैसले का इंतजार

शिक्षक संगठनों की मांग है कि VSK ऐप की तकनीकी खामियां पूरी तरह दूर होने तक केवल डिजिटल उपस्थिति को वेतन का आधार न बनाया जाए। साथ ही, स्कूलों में संधारित मैनुअल उपस्थिति रजिस्टर को भी मान्यता दी जाए, ताकि तकनीकी समस्याओं का खामियाजा शिक्षकों को न भुगतना पड़े।


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