CG Assembly Monsoon Session: रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में शुक्रवार को उस समय सियासी माहौल गरमा गया, जब कांग्रेस की ओर से राज्य की विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उनकी मंत्रिपरिषद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए 136 बिंदुओं का विस्तृत आरोप पत्र सदन के पटल पर रखा। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, तंज और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली।
चर्चा की शुरुआत करते हुए डॉ. महंत ने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार के 135 सप्ताह पूरे हो चुके हैं और 136वां सप्ताह चल रहा है। इसी आधार पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र लेकर आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का हर सप्ताह माताओं, बहनों और युवाओं के खिलाफ किसी नए षड्यंत्र की तरह रहा है। उन्होंने कहा कि वे सरकार के हर सप्ताह का “पाप, धोखा और नाकामी” का हिसाब लेकर सदन में आए हैं और यह आरोप केवल विपक्ष के नहीं बल्कि प्रदेश की जनता की आवाज हैं।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से संसदीय मर्यादा और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का यह महत्वपूर्ण अवसर है और सभी सदस्यों को संयम एवं परंपराओं का पालन करना चाहिए।
इसी दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के 25 वर्षों के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव की शुरुआत स्वयं नेता प्रतिपक्ष कर रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि नेता प्रतिपक्ष को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है।
भाजपा के इस बयान का जवाब देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तुरंत खड़े हुए और कांग्रेस विधायकों से हाथ उठाकर नेता प्रतिपक्ष के प्रति समर्थन जताने का आग्रह किया। इसके बाद कांग्रेस के सभी विधायकों ने हाथ उठाकर डॉ. महंत के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस पर अजय चंद्राकर ने फिर चुटकी लेते हुए कहा कि यह तो और भी बड़ी “कॉमेडी” हो गई कि नेता प्रतिपक्ष को सदन में अपनी ही पार्टी के विधायकों से विश्वास हासिल करना पड़ रहा है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अब पार्टी में ऐसी स्थिति आ गई है कि विधायकों को हाथ उठाकर अपने नेता पर भरोसा जताना पड़ रहा है।
बढ़ती राजनीतिक नोकझोंक के बीच डॉ. चरणदास महंत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने चर्चा शुरू करने से पहले भूपेश बघेल से पूछा था कि पहले वे बोलेंगे या वे स्वयं शुरुआत करें। इस पर भूपेश बघेल ने उन्हें चर्चा शुरू करने की सलाह दी थी। इस पर अजय चंद्राकर ने फिर तंज कसते हुए कहा कि इसका मतलब है कि वे हर काम उनसे पूछकर ही करते हैं। इस पर महंत ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “आपस में पूछने में कोई हर्ज नहीं है। हम सभी लोग मिलजुलकर काम करते हैं।”
अविश्वास प्रस्ताव पर शुरू हुई इस बहस ने विधानसभा का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था, किसानों, युवाओं और जनहित के अन्य मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिलने की संभावना है।

