CG News: गौरेला में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, गंभीर हालत में मरीज को बॉण्ड भरवाकर किया डिस्चार्ज

CG News: गौरेला में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, गंभीर हालत में मरीज को बॉण्ड भरवाकर किया डिस्चार्ज

CG News: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले के गौरेला स्थित सेमरा के निजी डी.डी. अस्पताल पर एक प्रसूता महिला के इलाज में गंभीर लापरवाही, पैसे ऐंठने और जिम्मेदारी से बचने के लिए जबरन बॉण्ड भरवाने के आरोप लगे हैं। इलाज के दौरान डेढ़ लाख रुपये खर्च कराने के बावजूद महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ और अंततः जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है तथा मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल पहुंचे थे परिजन

जानकारी के अनुसार, जिल्दा निवासी आनंद सिंह अपनी गर्भवती पत्नी लीलावती आर्मो को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। महिला की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे तत्काल बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल रेफर कर दिया। यह घटना देर रात करीब एक बजे की बताई जा रही है।

परिजनों के मुताबिक उस समय न तो एम्बुलेंस उपलब्ध थी और न ही आनंद सिंह के साथ कोई अन्य परिजन मौजूद था। पत्नी की गंभीर स्थिति और रात के समय परिवहन की समस्या को देखते हुए उन्होंने मजबूरी में जिला अस्पताल के पास स्थित निजी डी.डी. अस्पताल में भर्ती कराने का निर्णय लिया।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ती गई महिला की हालत

परिजनों के अनुसार 5 तारीख की रात महिला का ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया। शुरुआत में डॉक्टरों ने सब कुछ सामान्य बताया, लेकिन अगले ही दिन सुबह से लीलावती की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी।

पति आनंद सिंह का आरोप है कि जब भी उन्होंने डॉक्टरों से मरीज की स्थिति के बारे में जानकारी ली, तब उन्हें केवल आश्वासन दिया गया कि “सब ठीक हो जाएगा”। इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन लगातार इलाज के नाम पर पैसों की मांग करता रहा।

कर्ज लेकर जमा किए डेढ़ लाख रुपये

पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल ने पहले एक लाख रुपये जमा करवाए और बाद में 60 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार ने रिश्तेदारों और परिचितों से कर्ज लेकर कुल लगभग डेढ़ लाख रुपये अस्पताल में जमा किए।

इसके बावजूद मरीज की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के बजाय पैसों की मांग पर ज्यादा ध्यान दिया गया।

जिम्मेदारी से बचने के लिए भरवाया गया बॉण्ड

आनंद सिंह का आरोप है कि जब उनकी पत्नी की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई और वे आगे का खर्च उठाने में असमर्थ हो गए, तब उन्होंने किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने की मांग की।

आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए एक बॉण्ड पेपर पर उनसे हस्ताक्षर करवाए, जिसमें लिखा गया कि वे अपनी इच्छा और जिम्मेदारी पर मरीज को अस्पताल से ले जा रहे हैं। मजबूरी में हस्ताक्षर करने के बाद परिजन महिला को घर ले आए।

जिला अस्पताल में उपचार के दौरान हुई मौत

घर पहुंचने के बाद महिला की हालत और ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद परिजन उसे दोबारा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन स्थिति बेहद गंभीर थी।

जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बिपिन के अनुसार, मरीज को अस्पताल लाए जाने के समय उसे लगातार दौरे पड़ रहे थे और तेज बुखार था। मेडिकल टीम ने हरसंभव प्रयास किया, लेकिन भर्ती होने के लगभग आधे घंटे बाद ही महिला की मौत हो गई।

परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश

महिला की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि यदि समय पर उचित इलाज और सही चिकित्सकीय सलाह मिलती, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की पड़ताल करने तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

अस्पताल संचालक ने आरोपों को किया खारिज

वहीं इस पूरे मामले में डी.डी. अस्पताल के संचालक अखिलेश तिवारी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुसार ही उपचार किया गया। उन्होंने दावा किया कि इलाज के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई।

पहले भी लग चुके हैं लापरवाही के आरोप

गौरतलब है कि सेमरा स्थित डी.डी. अस्पताल पहले भी विवादों में रह चुका है। कुछ समय पहले इसी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में परिजनों ने प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की थी। ताजा घटना के बाद एक बार फिर अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब सभी की नजरें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि महिला की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी।


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