CG News: पारंपरिक शिल्प को बाजार से जोड़ने पर जोर, ‘आकार 2026’ में कलाकारों की आत्मनिर्भरता का दिया संदेश

CG News: पारंपरिक शिल्प को बाजार से जोड़ने पर जोर, ‘आकार 2026’ में कलाकारों की आत्मनिर्भरता का दिया संदेश

Chhattisgarh Latest News: रायपुर। संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा महंत घासीदास संग्रहालय परिसर स्थित मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित पारंपरिक शिल्प एवं कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार 2026’ का मंगलवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत समापन किया तथा उत्कृष्ट प्रशिक्षकों (कला गुरुओं) को स्मृति चिन्ह और प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

समारोह को संबोधित करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मिट्टी और अपनी संस्कृति से जुड़कर ही जीवन में वास्तविक समृद्धि और आनंद प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में संस्कृति मंत्री रहते हुए उन्होंने ‘आकार’ शिविर की शुरुआत की थी और यह उनके लिए गर्व का विषय है कि दो दशक बाद भी यह आयोजन पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन का मजबूत माध्यम बना हुआ है।

75 वर्ष के बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक ने दिखाई कला के प्रति रुचि

सांसद ने कहा कि कला की कोई उम्र नहीं होती। ‘आकार 2026’ में 75 वर्ष के बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने कहा कि बोनसाई और मिट्टी कला जैसी गतिविधियां जीवन में धैर्य, सृजनशीलता और विनम्रता का संदेश देती हैं। आज के दौर में जब बच्चे प्रकृति और मिट्टी से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे शिविर उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

प्रदेश के पांचों संभागों में हो ‘आकार’ का आयोजन

बृजमोहन अग्रवाल ने संस्कृति विभाग को सुझाव देते हुए कहा कि ‘आकार’ शिविर का आयोजन केवल रायपुर तक सीमित न रहे, बल्कि बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा सहित प्रदेश के सभी संभागों में किया जाए। उन्होंने आयोजन स्थल को और अधिक आकर्षक बनाने पर भी जोर दिया, ताकि बच्चों और युवाओं की सहभागिता बढ़ सके।

पारंपरिक शिल्प को मिले बाजार और रोजगार

सांसद ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक गहने, गोदना कला, टेराकोटा, रजवार आर्ट तथा बस्तर के काष्ठ और बांस शिल्प की राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान है। उन्होंने संस्कृति विभाग को परिसर में पारंपरिक गहनों की स्थायी दुकान स्थापित करने का सुझाव दिया, जिससे कलाकारों को सीधा बाजार और रोजगार उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि यहां सीखी गई कला भविष्य में युवाओं के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है।

रचनात्मकता से बढ़ता है आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के भीतर रचनात्मकता को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। कला और शिल्प गतिविधियां बच्चों के मन को शांत करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और एकाग्रता को भी मजबूत करती हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से वर्षभर कला का अभ्यास जारी रखने का आह्वान किया।

समारोह में फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे, आकार प्रभारी दुर्योधन महानंद, संस्कृति प्रेमी प्रताप पारख सहित बड़ी संख्या में कला गुरु, प्रशिक्षु, गणमान्य नागरिक और कला प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सांसद ने सफल आयोजन के लिए संस्कृति विभाग, कला गुरुओं और सभी प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।


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