Chhattisgarh Bilaspur News: बिलासपुर। बिलासपुर के सिम्स में स्वास्थ्य सुविधाओं और उपकरणों की कमी को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। CGMSC की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 31 अत्याधुनिक मशीनों की खरीदी के लिए टेंडर जारी किया गया था, जिनमें से 26 मशीनें खरीदी जा चुकी हैं, जबकि पांच मशीनों की खरीदी अभी बाकी है। हाईकोर्ट ने कौन-कौन सी मशीनें उपलब्ध करा दी गई हैं और कौन सी मशीनें बाकी हैं, इसकी पूरी जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही लंबित मशीनों की सप्लाई कब तक होगी, इसकी समयसीमा भी बताने कहा गया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नरों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में पहले की तुलना में व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है, हालांकि अभी भी कुछ कमियां मौजूद हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोर्ट कमिश्नर आवश्यकता के अनुसार सिम्स का मौके पर निरीक्षण कर व्यवस्थाओं से जुड़े दावों का सत्यापन कर सकते हैं।
पिछली सुनवाई में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव की ओर से शपथ पत्र पेश कर सिम्स में लगातार सुधार होने की जानकारी दी गई थी। इस दौरान कोर्ट कमिश्नर ने शपथ पत्र तैयार करने में एआई के इस्तेमाल की आशंका भी जताई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने कोर्ट कमिश्नरों को सिम्स का मौके पर निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद सिम्स की व्यवस्थाओं में काफी सुधार होने की बात सामने आई है। हालांकि पुराने भवन और अनावश्यक रेफरल के कारण अब भी कुछ परेशानियां बनी हुई हैं। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर अपूर्व त्रिपाठी ने चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के प्रयासों से सिम्स में हुए सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं में सुधार से मरीजों और आम जनता को काफी राहत मिली है।
स्वास्थ्य सचिव की ओर से पेश शपथ पत्र में बताया गया कि सिम्स के डीन और मेडिकल सुपरिटेंडेंट अब वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सीधे सफाई व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। बेकार हो चुके सामान को हटाने के लिए रोजाना गूगल शीट पर लॉगबुक भी मेंटेन की जा रही है। इसके अलावा सभी फ्लोर पर फायर स्प्रिंकलर सिस्टम चालू कर दिए गए हैं और फ्लोर मैनेजरों की तैनाती की गई है।
सिम्स भवन में छत से होने वाले सीपेज को रोकने और फॉल्स सीलिंग की मरम्मत का काम भी शुरू किया गया है। वहीं मरीजों का अनावश्यक दबाव कम करने के लिए आसपास के जिलों के सीएमएचओ और सिविल सर्जनों को पत्र भेजे गए हैं, ताकि जरूरत नहीं होने पर मरीजों को सिम्स रेफर न किया जाए।
मरीजों को अस्पताल में भटकना न पड़े, इसके लिए मुख्य गेट और कैजुअल्टी के पास नया हेल्पडेस्क भी बनाया गया है। हाईकोर्ट ने अब 31 अत्याधुनिक मशीनों की खरीदी और उनकी उपलब्धता से जुड़ी पूरी जानकारी शपथ पत्र में पेश करने के निर्देश दिए हैं।

