Bilaspur News: बाल संप्रेक्षण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था पर हाईकोर्ट गंभीर, 4.68 करोड़ की वित्तीय मदद पर केंद्र से मांगी जानकारी

Bilaspur News: बाल संप्रेक्षण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था पर हाईकोर्ट गंभीर, 4.68 करोड़ की वित्तीय मदद पर केंद्र से मांगी जानकारी

Chhattisgarh Bilaspur News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बाल देखभाल संस्थाओं और बाल संप्रेक्षण गृहों से किशोरों के फरार होने की घटनाओं को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाया है। अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से यह बताने को कहा है कि राज्य में बाल देखभाल संस्थाओं की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती में केंद्र सरकार की योजनाओं या दिशा-निर्देशों के तहत वित्तीय सहायता दी जा सकती है या नहीं।

मामला महासमुंद के सरकारी ऑब्जर्वेशन होम से आठ किशोरों के भागने और बिलासपुर की एक संस्था से चार किशोरों के फरार होने की घटनाओं से जुड़ा है। इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने बाल देखभाल संस्थाओं में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 156 सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मांगी गई है।

राज्य सरकार ने 8 अगस्त को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र भेजकर छत्तीसगढ़ की 26 बाल देखभाल संस्थाओं में 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती के लिए सालाना करीब 4.68 करोड़ रुपये के बजट की मांग की है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

डिवीजन बेंच ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव से शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती के लिए राज्य सरकार को किस योजना या प्रावधान के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। अदालत के इस निर्देश के बाद अब केंद्र के जवाब पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।

मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बाल देखभाल संस्थाओं में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।


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