Chhattisgarh Latest News: डॉक्टरों-कर्मचारियों की ऑनलाइन हाजिरी ट्रेजरी से जुड़ेगी, गैरहाजिर रहने पर कटेगी सैलरी; अटैचमेंट पर भी सख्ती

Chhattisgarh Latest News: डॉक्टरों-कर्मचारियों की ऑनलाइन हाजिरी ट्रेजरी से जुड़ेगी, गैरहाजिर रहने पर कटेगी सैलरी; अटैचमेंट पर भी सख्ती

Chhattisgarh Latest News: छत्तीसगढ़। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों और कर्मचारियों की मनमानी ऑनलाइन हाजिरी पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। अगले महीने से ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम को ट्रेजरी से जोड़ने की योजना है। इसके बाद डॉक्टरों से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक को उसी स्वास्थ्य संस्थान या कार्यालय से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी, जहां उनकी मूल पदस्थापना है। दूसरी जगह से लगाई गई हाजिरी मान्य नहीं होगी और गैरहाजिर रहने पर वेतन कटौती की कार्रवाई हो सकती है।

वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग में ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था लागू है, लेकिन इसका सॉफ्टवेयर ट्रेजरी सिस्टम से जुड़ा नहीं होने के कारण अटैचमेंट पर काम कर रहे डॉक्टरों और कर्मचारियों के वेतन पर इसका प्रभाव नहीं पड़ रहा है। इसी खामी के चलते कई जिलों में अटैचमेंट की व्यवस्था जारी रहने की जानकारी सामने आई है। अब राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के माध्यम से स्वास्थ्य संचालनालय में हाजिरी सिस्टम को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सिस्टम ट्रेजरी से जुड़ने के बाद उपस्थिति और वेतन व्यवस्था के बीच सीधा संबंध स्थापित होने की उम्मीद है।

रायपुर में अटैचमेंट व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे हैं। जानकारी के मुताबिक, तीन डॉक्टर सीएमएचओ कार्यालय में अटैच हैं। इसके अलावा नेत्र सहायक, वार्ड बॉय, स्वीपर और आया बाई जैसे कर्मचारी भी अपने मूल कार्यस्थल के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे हैं। पंडरी अस्पताल में तीन नेत्र सहायकों के अटैच होने का मामला भी सामने आया है, जबकि वहां नेत्र सहायकों के पद नहीं हैं और आंखों की जांच व इलाज की व्यवस्था भी नहीं है। माना में आंखों के लिए अलग अस्पताल संचालित होने के बावजूद इन कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर वापस नहीं भेजे जाने की बात कही गई है।

धमतरी, जगदलपुर, महासमुंद और दुर्ग सहित अन्य जिलों में भी डॉक्टरों और तकनीकी कर्मचारियों को सीएमएचओ कार्यालयों में अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ कर्मचारियों को दूसरे कार्यालयों में लगाए जाने से अस्पतालों में उपलब्ध स्टाफ और मरीजों के इलाज पर असर पड़ने की आशंका है। डॉक्टरों का समय मरीजों के उपचार के बजाय कार्यालयीन कार्यों में लगने से स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट खत्म करने की घोषणा विधानसभा में पहले की जा चुकी है। इसके बावजूद व्यवस्था जारी रहने पर संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं ने 22 सितंबर को पत्र जारी कर फरवरी-मार्च 2026 में दिए गए आश्वासनों के पालन का प्रमाण तीन दिन के भीतर मांगा था। विलंब होने पर कारण बताने के निर्देश भी दिए गए थे। हालांकि, करीब एक महीने बाद भी अटैचमेंट की स्थिति बने रहने की बात सामने आई है। अब ऑनलाइन हाजिरी को ट्रेजरी से जोड़ने की पहल को इस व्यवस्था पर नियंत्रण लगाने और कर्मचारियों की मूल पदस्थापना के अनुसार उपस्थिति सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।


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