नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान मीडियाकर्मियों, खासकर महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और पुलिस कार्रवाई को लेकर इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (IJU) ने कड़ी आपत्ति जताई है। यूनियन ने घटना की निंदा करते हुए आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल आपराधिक और विभागीय कार्रवाई तथा पूरे मामले की स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच की मांग की है।
आईजेयू के अध्यक्ष बलविंदर सिंह जम्मू और महासचिव डी. सोम सुंदर ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को जारी संयुक्त बयान में कहा कि प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया। यूनियन के मुताबिक, एक महिला पत्रकार ने ड्यूटी के दौरान एसीपी रैंक के अधिकारी पर कथित छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। आईजेयू ने कहा कि महिला पत्रकार की शिकायत के बावजूद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में कथित तौर पर कई घंटे तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। यूनियन ने इस देरी पर सवाल उठाते हुए मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
पत्रकारों से मारपीट और हिरासत का भी आरोप
आईजेयू के अनुसार, प्रदर्शन को कवर कर रहीं मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी कई महिला पत्रकारों और अन्य मीडियाकर्मियों को कथित तौर पर शारीरिक आक्रामकता, डराने-धमकाने और हिरासत जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। यूनियन का कहना है कि संबंधित पत्रकारों ने अपने वैध प्रेस पहचान पत्र भी प्रदर्शित किए थे। आईजेयू ने कहा कि पत्रकारों को सार्वजनिक प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान अपने पेशेवर दायित्व निभाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।
इंटरनेट बंद किए जाने पर भी जताई आपत्ति
यूनियन ने जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने पर भी सवाल उठाया है। आईजेयू का आरोप है कि बिना स्पष्ट सार्वजनिक आदेश के इंटरनेट सेवाओं पर इस तरह की रोक से मौके से होने वाली पत्रकारिता और स्पॉट रिपोर्टिंग प्रभावित होती है। यूनियन ने कहा कि सार्वजनिक घटनाओं की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए निर्बाध संचार व्यवस्था जरूरी है और इंटरनेट प्रतिबंध लगाए जाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
IJU ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
आईजेयू ने सरकार और प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें आरोपी पुलिस अधिकारी और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई शुरू करना, पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिरासत की स्वतंत्र व समयबद्ध जांच कराना तथा पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना शामिल है। यूनियन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि सार्वजनिक प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान पत्रकार बिना हिंसा, उत्पीड़न या गैरकानूनी हिरासत के भय के अपना काम कर सकें।
स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन छत्तीसगढ़ ने भी किया विरोध
जंतर-मंतर की घटना को लेकर छत्तीसगढ़ में आईजेयू से जुड़े संगठन स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन छत्तीसगढ़ ने भी विरोध जताया है। संगठन ने पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय बताया। संगठन ने कहा कि देश की राजधानी में पत्रकारों के साथ इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

