CG Bilaspur News: बिलासपुर में अवैध प्लाटिंग और सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत, कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग

CG Bilaspur News: बिलासपुर में अवैध प्लाटिंग और सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत, कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग

CG Bilaspur News: बिलासपुर। जिले के ग्राम परसदा में कथित अवैध प्लाटिंग, शासकीय जमीन पर अतिक्रमण और कॉलोनी के गंदे पानी से निस्तारी तालाब के दूषित होने का मामला सामने आया है। मामले को लेकर शिकायतकर्ता संत राम लहरे ने कलेक्टर से शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में नितिन त्रिपाठी और अम्बरीस गुप्ता पर बिना ले-आउट स्वीकृति और रेरा पंजीयन के प्लाट काटकर बेचने तथा वहां निर्माण कराए जाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप

शिकायतकर्ता के मुताबिक ग्राम परसदा, पेण्डारी, तहसील सकरी में खसरा नंबर 249/1 और 284 की करीब 20 से 30 डिसमिल शासकीय भूमि पर कथित रूप से कब्जा कर निर्माण और प्लाटिंग की जा रही है। आरोप है कि शासकीय भूमि निजी जमीन से लगी होने का फायदा उठाकर उस पर भी अतिक्रमण किया जा रहा है।

बिना ले-आउट और रेरा पंजीयन के कॉलोनी विकसित करने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोगों द्वारा ग्राम एवं नगर निवेश विभाग से ले-आउट स्वीकृत कराए बिना तथा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में पंजीयन के बिना कॉलोनी विकसित की जा रही है। छोटे-छोटे हिस्सों में जमीन बेचकर वहां भवन निर्माण कराए जाने का भी दावा शिकायतकर्ता ने किया है।

निस्तारी तालाब में गंदा पानी छोड़ने की शिकायत

मामले में पर्यावरण और ग्रामीणों की परेशानी से जुड़ी शिकायत भी की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कॉलोनी से निकलने वाले सीवरेज और गंदे पानी को नाली के जरिए ग्राम परसदा के निस्तारी तालाब में छोड़ा जा रहा है। इससे तालाब का पानी दूषित होने और ग्रामीणों को निस्तारी में परेशानी होने का दावा किया गया है।

कलेक्टर से कई बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता संत राम लहरे ने कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कथित अवैध प्लाटिंग और निर्माण पर तत्काल रोक लगाने, शासकीय जमीन से अतिक्रमण हटाने तथा संबंधित भूमि की खरीदी-बिक्री, नामांतरण और डायवर्सन पर रोक लगाने की मांग की है। इसके अलावा शिकायत में कथित अवैध निर्माण हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी की गई है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल मामला शिकायत के स्तर पर है। लगाए गए आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर हैं कि शिकायत में बताए गए शासकीय भूमि, अवैध प्लाटिंग, निर्माण और तालाब में गंदा पानी छोड़े जाने के आरोपों की जांच किस तरह की जाती है और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।


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