Durg News : हेमचंद यादव यूनिवर्सिटी में गरमाया वित्तीय अधिकारों का मामला, तीन साल के लेन-देन के ऑडिट की मांग

Durg News : हेमचंद यादव यूनिवर्सिटी में गरमाया वित्तीय अधिकारों का मामला, तीन साल के लेन-देन के ऑडिट की मांग

Chhattisgarh Durg News : दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप के वित्तीय अधिकार वापस लेने का निर्णय लिया है। आगामी आदेश तक विश्वविद्यालय के भुगतान संबंधी प्रपत्रों और बैंकिंग संव्यवहारों पर वित्त अधिकारी के साथ द्वितीय अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के रूप में अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. नीलू श्रीवास्तव अधिकृत रहेंगी। अब कुलसचिव के हस्ताक्षर से विश्वविद्यालय में कोई वित्तीय लेन-देन नहीं किया जाएगा।

विश्वविद्यालय की ओर से आयुक्त, उच्च शिक्षा संचालनालय को पत्र भेजकर इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा गया है। पत्र के साथ कुलसचिव के विरुद्ध दर्ज एफआईआर की प्रति भी भेजी गई है। इसमें कहा गया है कि कुलसचिव विश्वविद्यालय के वित्तीय देयकों, नस्तियों और अन्य प्रपत्रों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, जबकि जमानत पर रहने वाले व्यक्ति द्वारा वित्तीय कार्य किए जाने को लेकर वित्तीय नियमों के तहत आपत्ति जताई गई है।

पत्र में विश्वविद्यालय निधि में अनियमितता से संबंधित मामले की जांच का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में भुगतान, बैंकिंग, वेतन वितरण, क्रय और अभिलेखों की अभिरक्षा जैसी जिम्मेदारियां कुलसचिव के पास होने को लेकर संस्थागत औचित्य पर सवाल उठाए गए हैं। अभिलेखों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई गई है। कार्यपरिषद के निर्णय की जानकारी उच्च शिक्षा संचालनालय को भी भेजी गई है।

हाल ही में हुई कार्यपरिषद की बैठक में कुलसचिव के विरुद्ध दर्ज एफआईआर के बाद उनके वित्तीय कामकाज में बने रहने के मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान कुलपति ने कुलसचिव से कहा कि मामला कार्यपरिषद के सामने है और हितधारक होने के कारण निष्पक्ष चर्चा के लिए उन्हें संबंधित कंडिका की चर्चा से अलग रहना होगा। कुलसचिव ने कहा कि यदि कार्यपरिषद के सभी सदस्य ऐसा चाहते हैं, तभी वे बैठक से बाहर जाएंगे। इसके बाद सदस्यों ने लिखित सहमति देते हुए हस्ताक्षर किए और कुलसचिव को चर्चा से अलग कर दिया गया। आगे की कार्यवाही के लिए डॉ. नीलू श्रीवास्तव को प्रभारी सचिव बनाया गया।

सामान्य तौर पर विश्वविद्यालय के वित्तीय कामकाज में कुलसचिव वित्त अधिकारी के साथ प्रक्रिया पूरी करते हैं। अब यह जिम्मेदारी डॉ. नीलू श्रीवास्तव को दी गई है। वे वित्त अधिकारी के साथ मिलकर बैंकिंग और वित्तीय कार्यों का संचालन करेंगी। डॉ. श्रीवास्तव शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में प्राध्यापक हैं और शासन की प्रतिनियुक्ति पर विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता छात्र कल्याण के पद पर कार्यरत हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार वे इस दायित्व के लिए आवश्यक अर्हताएं पूरी करती हैं।

कार्यपरिषद ने अपने संकल्प में कहा है कि कुलसचिव के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने के बाद विश्वविद्यालय के वित्तीय हित, प्रशासनिक निष्पक्षता और कामकाज की निरंतरता को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। इसके लिए छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 24 के संबंधित प्रावधानों, धारा 24-क तथा विश्वविद्यालय में लागू परिनियमों, अध्यादेशों, विनियमों और वित्तीय नियमों के तहत प्राप्त शक्तियों का हवाला दिया गया है।

बैठक में वित्त विभाग के संयुक्त सचिव की ओर से भी यह स्पष्ट किए जाने का उल्लेख है कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने और उसके जमानत पर होने की स्थिति में वित्त विभाग के नियमों के अनुसार शासकीय भुगतान की प्रक्रिया में उसकी भूमिका नहीं हो सकती। ऐसी स्थिति में वित्तीय प्रभार किसी अन्य अधिकारी को सौंपने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसी आधार पर कार्यपरिषद ने कुलसचिव के वित्तीय अधिकार वापस लेने का निर्णय लिया।

इधर, विश्वविद्यालय के पिछले तीन वर्षों के वित्तीय लेन-देन का ऑडिट कराने की मांग भी सामने आई है। शिकायत में वित्तीय अभिलेख, बैंक दस्तावेज, कैशबुक और क्रय संबंधी नस्तियों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। सत्र 2024-25 की परीक्षाओं से संबंधित एक बाहरी फर्म को स्वीकृत करीब 92.10 लाख रुपये के भुगतान सहित कुछ अन्य खर्चों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। कुलाधिपति से विश्वविद्यालय के प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।


Related Articles