Chhattisgarh Dongargarh News : डोंगरगढ़। जनपद पंचायत डोंगरगढ़ का 24 अगस्त का एक आदेश इन दिनों चर्चा में है। महालेखाकार (लेखापरीक्षा) की टीम 25 अगस्त से 1 सितंबर तक जनपद पंचायत क्षेत्र में ऑडिट और जांच के लिए पहुंचने वाली है। इसके लिए जनपद पंचायत ने अधीनस्थ अधिकारियों को ऑडिट टीम के ग्राम पंचायतों में जाने, ठहरने और भोजन-चाय की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में विश्राम, भोजन, चाय और नाश्ते की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
ऑडिट टीम द्वारा पंचायतों के रिकॉर्ड और खातों की जांच किया जाना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि जिन पंचायतों के खातों की जांच होनी है, क्या उन्हीं पंचायतों से ऑडिट टीम के लिए भोजन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था कराई जा सकती है। जनपद पंचायत के आदेश में महालेखाकार कार्यालय के 17 अगस्त के पत्र का हवाला दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ऑडिट टीम के भोजन, चाय-नाश्ते और ठहरने का खर्च कौन उठाएगा और इसके लिए किस सरकारी मद का उपयोग किया जाएगा।
दरअसल, ऑडिट का उद्देश्य सरकारी धन के उपयोग और वित्तीय प्रक्रिया की जांच करना होता है। ऐसे में अगर किसी पंचायत के खाते की जांच करने वाली टीम के खाने-पीने का खर्च उसी पंचायत के सरकारी खाते से किया जाता है, तो खर्च की वैधता और नियमों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऑडिट प्रक्रिया में टीम की स्वतंत्रता और निष्पक्षता महत्वपूर्ण मानी जाती है, इसलिए किसी भी तरह के आतिथ्य या सुविधा को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
हालांकि, केवल सामने आए आदेश के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई है। आदेश में यह स्पष्ट नहीं है कि ग्राम पंचायतों को अपने खाते से ऑडिट टीम का भोजन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें केवल व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है। ऐसे में अब मुख्य सवाल यह है कि इस व्यवस्था का भुगतान किस स्तर से और किस बजट मद से किया जाएगा।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि आदेश में महालेखाकार कार्यालय के 17 अगस्त के मूल पत्र का हवाला दिया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मूल पत्र में ऑडिट टीम के लिए भोजन, चाय-नाश्ते और ठहरने की व्यवस्था को लेकर क्या निर्देश दिए गए थे। यदि मूल पत्र में केवल ऑडिट और निरीक्षण की प्रक्रिया का उल्लेख है, तो यह भी स्पष्ट करना होगा कि जनपद पंचायत ने अपनी ओर से इन व्यवस्थाओं के लिए किस नियम के तहत निर्देश जारी किए।
फिलहाल सामने आए आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऑडिट टीम के भोजन, चाय-नाश्ते और ठहरने का खर्च कौन उठाएगा और इसके लिए किस सरकारी खाते या बजट मद का इस्तेमाल किया जाएगा। जनपद पंचायत और संबंधित महालेखाकार कार्यालय की ओर से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

