Raipur News: छत्तीसगढ़ में फेफड़ों की सर्जरी का प्रमुख केंद्र बना अंबेडकर अस्पताल, आयुष्मान योजना से हो रहे ऑपरेशन

Raipur News: छत्तीसगढ़ में फेफड़ों की सर्जरी का प्रमुख केंद्र बना अंबेडकर अस्पताल, आयुष्मान योजना से हो रहे ऑपरेशन

Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने फेफड़ों की जटिल सर्जरी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने महज 20 दिनों में फेफड़ों की 9 लोबेक्टॉमी सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। वहीं पिछले दो महीनों में कुल 13 मरीजों की लोबेक्टॉमी सर्जरी की गई। इनमें दो मरीज ऐसे थे, जिन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव यानी हेमोप्टाइसिस की शिकायत थी और उनकी आपातकालीन सर्जरी करनी पड़ी।

इन जटिल ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर का इस्तेमाल किया गया। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इस तकनीक से सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं, खासकर ब्रोन्कोप्लूरल फिस्टुला की संभावना को कम करने में मदद मिलती है। विभाग ने इतने कम समय में बड़ी संख्या में लोबेक्टॉमी सर्जरी को संस्थान के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, लोबेक्टॉमी में बीमारी से प्रभावित फेफड़े के एक हिस्से यानी लोब को ऑपरेशन के जरिए निकाल दिया जाता है। यह प्रक्रिया काफी जटिल होती है और इसके लिए विशेषज्ञता के साथ आधुनिक तकनीक की आवश्यकता होती है। एडवांस्ड लंग स्टेपलर की मदद से संक्रमित हिस्से को सुरक्षित तरीके से निकालने और ऑपरेशन के बाद होने वाली जटिलताओं को कम करने में सहायता मिलती है।

छत्तीसगढ़ में फेफड़ों की लोबेक्टॉमी सर्जरी के प्रमुख कारणों में एस्परजिलोमा और ब्रोन्किएक्टैसिस शामिल हैं। एस्परजिलोमा एक फंगल संक्रमण है, जो अक्सर पहले टीबी से प्रभावित रहे फेफड़ों या कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में देखा जाता है। वहीं ब्रोन्किएक्टैसिस में फेफड़ों के भीतर संक्रमण के कारण संरचनात्मक बदलाव हो सकते हैं और कई मामलों में मरीज को खांसी के दौरान खून आने की समस्या होती है।

इसके अलावा वैस्कुलर मालफॉर्मेशन, लंग एब्सिस और फेफड़ों का कैंसर भी खांसी या बलगम में खून आने के कारण हो सकते हैं। यदि फेफड़ों का कैंसर शुरुआती अवस्था में हो और एक लोब तक सीमित हो, तो लोबेक्टॉमी के जरिए प्रभावित हिस्से को निकालकर मरीज के उपचार में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।

अस्पताल के अनुसार, हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में छत्तीसगढ़ में फेफड़ों से जुड़ी कई तरह की प्रमुख सर्जरी की जाती हैं। इनमें डिकॉर्टिकेशन, लोबेक्टॉमी, सेगमेंटेक्टॉमी और न्यूमोनेक्टॉमी शामिल हैं। न्यूमोनेक्टॉमी में एक तरफ के पूरे फेफड़े को निकालना पड़ता है।

सामान्य तौर पर इस संस्थान में एक साल में करीब 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी होती हैं। यहां छत्तीसगढ़ के अलावा बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक इन सर्जरियों को आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया जाता है।

लोबेक्टॉमी में बीमारी से प्रभावित फेफड़े के हिस्से को निकाल दिया जाता है। मानव शरीर में दायां फेफड़ा तीन लोब और बायां फेफड़ा दो लोब से बना होता है। जब एस्परजिलोमा, ब्रोन्किएक्टैसिस या लंग ट्यूमर जैसी बीमारी किसी एक लोब तक सीमित रहती है, तब चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार उस प्रभावित हिस्से को ऑपरेशन के जरिए निकाला जा सकता है। आधुनिक स्टेपलर तकनीक के इस्तेमाल से सर्जरी के बाद होने वाली कुछ जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है। सामान्यतः मरीज को ऑपरेशन के करीब 6 से 8 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।


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