Chhattisgarh Bhilai News: भिलाई। दुर्ग जिले के चरौदा क्षेत्र स्थित पंचशील नगर में एक घर से छत्तीसगढ़ के सबसे जहरीले सांपों में से एक दुर्लभ श्वेतवर्णी (ल्यूसिस्टिक) करैत का सफल रेस्क्यू किया गया है। वन विभाग ने इसे प्रदेश की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना बताया है। रेस्क्यू के बाद सांप को राजनांदगांव वनमंडल के मनगटा आरक्षित वन क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया। वन मंत्री केदार कश्यप ने भी सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की है।
वन विभाग के अनुसार, 21 जुलाई को पंचशील नगर के एक मकान में सफेद रंग का सांप दिखाई देने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और सर्प रेस्क्यूअर विजय शर्मा मौके पर पहुंचे और सुरक्षित तरीके से सांप का रेस्क्यू किया। जांच के बाद विशेषज्ञों ने इसकी पहचान ल्यूसिस्टिक करैत के रूप में की।
वन विभाग ने बताया कि ल्यूसिज्म (Leucism) एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति है, जिसमें शरीर में मेलानिन की कमी होने से सांप का रंग सामान्य काले-पीले की बजाय सफेद या हल्का दिखाई देता है। यह स्थिति अल्बिनिज्म से अलग होती है, क्योंकि इसमें आंखों का रंग सामान्य रहता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण एशिया में श्वेतवर्णी करैत के मामले बेहद कम सामने आए हैं। भारत में अब तक महाराष्ट्र और ओडिशा सहित कुछ स्थानों पर तथा नेपाल में इसके सीमित उदाहरण दर्ज किए गए हैं। दुर्ग वनमंडलाधिकारी दिपेश कपिल के निर्देश पर परीक्षण के बाद सांप को राजनांदगांव वनमंडल के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक आरएफ-549, मनगटा में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
करैत भारत के सबसे विषैले सांपों में गिना जाता है। इसका विष न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रंग सफेद होने के बावजूद इस दुर्लभ करैत का विष और स्वभाव सामान्य करैत की तरह ही खतरनाक होता है।

