Chhattisgarh Mahasamund News: महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों तक घूम रहे कुत्तों के हमलों से लोग दहशत में हैं। इस बीच सरकारी अस्पतालों और पशु चिकित्सा केंद्रों में एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। कई लोगों का आरोप है कि वैक्सीन नहीं मिलने से उन्हें निजी मेडिकल स्टोरों से महंगे दाम पर टीके खरीदने पड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, डॉग बाइट की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं, पशु औषधालय में पिछले करीब एक महीने से एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है। ऐसे में पशुपालकों को अपने पालतू या घायल पशुओं के इलाज के लिए बाहर से वैक्सीन खरीदने की सलाह दी जा रही है।
झलप निवासी जॉन ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में टीका नहीं मिलने के कारण आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनका कहना है कि निजी मेडिकल स्टोरों से वैक्सीन खरीदना हर परिवार के लिए आसान नहीं है।
उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी परेशानी
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई उप स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता प्रभावित है। ऐसे में मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल भेजा जा रहा है।
हालांकि, इस मामले में अधिकारियों के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ. अंजना नायडू ने कहा कि पिछले एक महीने से एंटी रेबीज वैक्सीन की सप्लाई नहीं हुई है और इसके लिए मांगपत्र भेजा गया है।
वहीं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आई. नागेश्वर राव का कहना है कि अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है। उनके अनुसार, कुछ अस्पतालों में उपलब्धता कम-ज्यादा हो सकती है, लेकिन जिले में वैक्सीन की कोई व्यापक कमी नहीं है।
नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
स्थानीय लोगों ने नगर पालिका पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने, नसबंदी अभियान चलाने और कुत्तों के टीकाकरण को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने और पर्याप्त एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराने की मांग की है।

