Chhattisgarh Latest News: रायपुर। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में खनिज क्षेत्र की अहम भूमिका रही है। लंबे समय से अवैध खनन, राजस्व हानि और पारदर्शिता की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में व्यापक सुधार किए गए हैं। डिजिटल तकनीक आधारित नई व्यवस्थाओं के चलते खनन संचालन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बना है। इन सुधारों का सीधा असर राज्य के राजस्व पर भी दिखाई दिया है, जहां खनिज क्षेत्र से 16,757 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ से बदली खनन व्यवस्था
राज्य सरकार ने खनन क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल लागू किया है। इस नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से ई-रॉयल्टी पर्ची, ई-अभिवहन पारपत्र और राजस्व संग्रहण जैसी प्रक्रियाएं पूरी तरह ऑनलाइन हो गई हैं। इससे मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है और खदान संचालकों को 24 घंटे सेवाओं का लाभ मिल रहा है। विभाग अब खदानों की रियल टाइम निगरानी भी कर पा रहा है।
DMF पोर्टल 2.0 से खनन प्रभावित क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ
खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। ‘DMF पोर्टल 2.0’ के जरिए अब विकास कार्यों की निगरानी, वित्तीय स्वीकृति और प्रबंधन पूरी तरह डिजिटल हो गया है। सामाजिक सर्वेक्षण और बेसलाइन स्टडी को अनिवार्य बनाकर जरूरत आधारित विकास योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
रेत खदानों की ई-नीलामी से बढ़ी पारदर्शिता
सरकार ने रेत खनन क्षेत्र में भी व्यापक सुधार किए हैं। नई नीति के तहत रेत खदानों का आवंटन अब ई-टेंडर के माध्यम से किया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 200 नई रेत खदानों की नीलामी हो चुकी है। इससे रेत की उपलब्धता बेहतर हुई है और अवैध उत्खनन पर नियंत्रण लगाने में मदद मिली है।
ड्रोन और सैटेलाइट से होगी निगरानी
अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने ड्रोन निगरानी और ई-चेक गेट प्रणाली शुरू की है। पांच ड्रोन और दस प्रमुख परिवहन मार्गों पर ई-चेक गेट स्थापित किए जा रहे हैं। वहीं, 1900 से अधिक गौण खनिज खदानों की निगरानी सैटेलाइट तकनीक से की जा रही है, जिससे स्वीकृत क्षेत्र के बाहर खनन होने पर तुरंत जानकारी मिल सके।
आदिवासी परिवारों की आय बढ़ाने पर भी फोकस
बस्तर क्षेत्र में टिन खनिज संग्रह करने वाले आदिवासी परिवारों के लिए डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू की जा रही है। साथ ही टिन की खरीद दर को 640 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 2800-2900 रुपये प्रति किलो तक कर दिया गया है, जिससे हजारों आदिवासी परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

