राज्यसभा में मजबूत हो रहा NDA, 27 सीटों पर चुनाव के बाद बदल गया सदन का गणित, दो-तिहाई बहुमत से करीब भाजपा गठबंधन

राज्यसभा में मजबूत हो रहा NDA, 27 सीटों पर चुनाव के बाद बदल गया सदन का गणित, दो-तिहाई बहुमत से करीब भाजपा गठबंधन

NDA in Rajya Sabha: नई दिल्ली। राज्यसभा की 27 सीटों पर हुए चुनाव के बाद उच्च सदन का सियासी गणित भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है। झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी की जीत के बाद राज्यसभा में NDA का आंकड़ा बढ़कर 153 तक पहुंच गया है। वहीं, पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चार सांसदों के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों पर संभावित चुनाव के बाद गठबंधन की ताकत और बढ़ सकती है।

पश्चिम बंगाल से टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बड़ाईक और कोयल मलिक के इस्तीफे के बाद चार सीटें रिक्त हुई हैं। इन सीटों पर चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण भाजपा के पक्ष में रहने की संभावना जताई जा रही है। यदि NDA इन सीटों पर सफलता हासिल करता है तो उसका आंकड़ा 157 तक पहुंच सकता है।

संविधान संशोधन के लिए चाहिए 164 सांसदों का समर्थन

राज्यसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 164 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है। पश्चिम बंगाल की चार सीटें जीतने के बाद भी NDA इस आंकड़े से सात सीट पीछे रहेगा।

वर्तमान में NDA के साथ 153 सांसद

भाजपा के 115 सांसदों के अलावा तेलुगु देशम पार्टी, जनता दल (यू), एआईएडीएमके और एनसीपी के चार-चार सदस्य, शिवसेना के दो सदस्य तथा कई छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों का समर्थन NDA को प्राप्त है। नामित और बाहरी समर्थन देने वाले सांसदों को मिलाकर गठबंधन की संख्या 153 मानी जा रही है।

YSRCP का समर्थन मिलने पर 161 तक पहुंच सकता है आंकड़ा

यदि आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के चार सांसद पूर्व की तरह महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का समर्थन करते हैं तो NDA का आंकड़ा 161 तक पहुंच सकता है। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत से वह केवल तीन सीट पीछे रह जाएगा।

INDIA गठबंधन के पास 63 सांसद

राज्यसभा में कांग्रेस के 30 सांसदों के साथ तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, माकपा, झामुमो, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य सहयोगी दलों को मिलाकर INDIA गठबंधन की ताकत 63 सांसदों की है।

26 सांसद किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं

डीएमके, बीजद, वाईएसआरसीपी, आम आदमी पार्टी, बीआरएस, बसपा, एमएनएम और डीएमडीके समेत कुल 26 सांसद ऐसे हैं जो न तो NDA और न ही INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं। ऐसे में किसी बड़े विधेयक के दौरान इन दलों का रुख बेहद अहम हो सकता है।

वॉकआउट या अतिरिक्त समर्थन से खुल सकता है रास्ता

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कुछ दलों के सांसद सरकार का समर्थन करते हैं या मतदान के समय विपक्षी सांसद वॉकआउट करते हैं तो राज्यसभा में संविधान संशोधन जैसे अहम विधेयकों को पारित कराने का रास्ता आसान हो सकता है।


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