Chhattisgarh Durg News: दुर्ग। केंद्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ का दो दिवसीय गढ़ सम्मेलन 13 एवं 14 जून को त्रिमूर्ति महामाई धमधागढ़ परिसर में श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता के माहौल में संपन्न हुआ। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन, मातृशक्ति, युवा शक्ति एवं बेटियों ने भाग लेकर समाज के विकास और संगठन को मजबूत बनाने के संकल्प लिए।
सम्मेलन का शुभारंभ त्रिमूर्ति महामाई धमधागढ़ के कुल देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इसके पश्चात उपस्थित अतिथियों का पारंपरिक स्वागत एवं सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, खैरागढ़ एवं गंडई राजघराने के प्रतिनिधि, केंद्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ के अध्यक्ष कमलेश धुर्वे सोरी तथा पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर मरकाम सहित अनेक समाज प्रमुख उपस्थित रहे।
अतिथियों ने समाज को संबोधित करते हुए शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, बेटा-बेटी को समान अधिकार प्रदान करने, सामाजिक आयोजनों में फिजूलखर्ची कम करने तथा सामूहिक विवाह को बढ़ावा देने का आह्वान किया। वक्ताओं ने आदिवासी समाज से अपनी संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों के संरक्षण एवं संवर्धन का आग्रह किया।
सम्मेलन में जनगणना के दौरान जाति के रूप में “गोंड”, भाषा के रूप में “गोंडी” तथा धर्म के रूप में “गोंडी धर्म” का उल्लेख करने की अपील की गई। साथ ही समाज के अंतिम व्यक्ति तक संगठन की पहुंच सुनिश्चित करने, मुंडा परिक्षेत्रों में नियमित बैठकों के माध्यम से जागरूकता फैलाने और धमधागढ़ के नियमों का पालन करने पर जोर दिया गया।
वक्ताओं ने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभावान विद्यार्थियों को समाज के सहयोग से उच्च शिक्षा दिलाने तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति को संगठन से जोड़कर रखने का संकल्प भी दोहराया। सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों ने इन सभी प्रस्तावों पर सहमति जताते हुए उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में लागू करने का निर्णय लिया।
कार्यक्रम में महासचिव गोरेलाल ठाकुर, धनेश्वर धुर्वे, कोषाध्यक्ष महावीर, योगेश्वर ठाकुर, उमाशंकर नेताम, संगीत सोरी, माधुरी ठाकुर, युवा प्रभाग अध्यक्ष दीपेश मंडावी, हरेन्द्र नेताम, चंद्रकला तारम, उषा ठाकुर, अशोक कंगाली, जयपाल सिंह ठाकुर, बहादुर सिंह नेताम सहित विभिन्न जिलों एवं तहसीलों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सम्मेलन के समापन अवसर पर सभी अतिथियों को प्रतीक चिन्ह एवं पीला गमछा भेंट कर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। दो दिवसीय यह आयोजन समाज में शिक्षा, एकता, संस्कृति संरक्षण और संगठनात्मक मजबूती का संदेश देकर संपन्न हुआ।

