Police Commissioner System Raipur : रायपुर का ‘पहला कमिश्नर’ कौन? 22 थानों की कमान या 4 जिलों का रुतबा, प्रतिष्ठा की लड़ाई में फंसी नई पुलिसिंग व्यवस्था

Police Commissioner System Raipur : रायपुर का ‘पहला कमिश्नर’ कौन? 22 थानों की कमान या 4 जिलों का रुतबा, प्रतिष्ठा की लड़ाई में फंसी नई पुलिसिंग व्यवस्था

रायपुर। Police Commissioner System Raipur राजधानी में कमिश्नर व्यवस्था लागू होने के बाद की परिस्थितियों पर प्रदेश के आईपीएस आपस में ही उलझ गए हैं। उनके सामने धर्म संकट है कि रायपुर शहर के 22 पुलिस थानों के कमिश्नर बनें या शेष बचे रायपुर देहात के 11 थानों के साथ धमतरी, बलौदाबाजार, महासमुंद एवं गरियाबंद के आईजी बनें। अर्थात् चार जिला और 11 थाना बनाम रायपुर के 22 थानों का मामला अब प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। आईएएस लॉबी पहले ही पुलिस कमिश्नर को अधिकार दिए जाने के मार्ग में तरह-तरह के प्रश्न खड़े कर रही है।

3 जनवरी से राजधानी में पुलिस कमिश्नर प्रणाली

Police Commissioner System Raipur शहरी पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार 23 जनवरी से राजधानी में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने जा रही है, लेकिन इसके आरंभ से पहले ही पुलिस महकमे के भीतर उत्साह के बजाय असमंजस और संशय का माहौल है। इसकी सबसे बड़ी वजह कमिश्नरी का सीमित दायरा और प्रस्तावित पदों की व्यावहारिक हैसियत मानी जा रही है।

नवा रायपुर क्षेत्र को लेकर चर्चा

नवा रायपुर क्षेत्र को कमिश्नरी से अलग कर ग्रामीण क्षेत्र में शामिल करने की चर्चा है। नवा रायपुर को रायपुर रेंज के अंतर्गत रखा जाएगा और वहां देहात एसपी की तैनाती होगी। ऐसे में राजधानी के शहरी क्षेत्र तक सीमित कमिश्नरेट के कारण पुलिस कमिश्नर का प्रभाव और अधिकार अपेक्षा से कम होने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस कमिश्नर के बाद दूसरा अहम पद ज्वाइंट कमिश्नर का होगा, जिस पर डीआईजी रैंक के अधिकारी की नियुक्ति प्रस्तावित है। यहीं से अफसरों के बीच सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्तमान में कई डीआईजी रैंक के अधिकारी बड़े जिलों में एसपी के तौर पर स्वतंत्र रूप से जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में रायपुर कमिश्नरेट में एडिशनल एसपी जैसे कार्यभार वाला पद स्वीकार करना उन्हें पदावनति जैसा प्रतीत हो रहा है।

कमिश्नर की दौड़ में गर्ग और शुक्ला आगे

पहले पुलिस कमिश्नर के लिए आईजी रैंक के आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। इस दौड़ में दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग और बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। रामगोपाल गर्ग की छवि ईमानदार और सख्त अधिकारी की रही है। वे सात वर्ष तक सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर रह चुके हैं और कानून व नियमों की गहरी समझ रखते हैं।

वहीं संजीव शुक्ला रायपुर के एसपी रह चुके हैं और स्थानीय परिस्थितियों तथा नेटवर्क से अच्छी तरह परिचित हैं। हालांकि जनवरी 2027 में वे सेवानिवृत्त हो जाएंगे, यानी नियुक्ति होने पर उनके पास महज 11 महीने का कार्यकाल रहेगा। इसके अलावा अजय यादव और बद्री नारायण मीणा के नाम भी चर्चा में हैं, जो पूर्व में रायपुर के पुलिस कप्तान रह चुके हैं।

ज्वाइंट कमिश्नर के लिए पांच नामों पर मंथन

सूत्रों के अनुसार, यदि रामगोपाल गर्ग को पुलिस कमिश्नर बनाया जाता है, तो रायपुर की तासीर को समझने वाले किसी अनुभवी डीआईजी को ज्वाइंट कमिश्नर नियुक्त किया जाएगा। इस पद के लिए रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह, एसआईबी में पदस्थ अजातशत्रु बहादुर सिंह, जशपुर एसपी शशिमोहन सिंह, बिलासपुर एसपी रजनेश सिंह और दुर्ग एसपी विजय अग्रवाल के नामों पर विचार चल रहा है। ये सभी अधिकारी पहले रायपुर में पदस्थ रह चुके हैं।

पांच दिन शेष, जारी नहीं हुई अधिसूचना

कमिश्नरेट लागू होने में अब केवल पांच दिन शेष हैं, लेकिन गृह विभाग अब तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं कर पाया है। बताया जा रहा है कि विधि विभाग से हरी झंडी मिलने के बावजूद दंडाधिकार को लेकर आईएएस और आईपीएस लॉबी के बीच खींचतान चल रही है। इसी कारण पुलिस कमिश्नर को मिलने वाले अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

हालांकि चर्चा है कि नई व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर को 16 महत्वपूर्ण अधिकार दिए जाएंगे, लेकिन शस्त्र लाइसेंस और आबकारी लाइसेंस से जुड़े अधिकार कमिश्नर को नहीं दिए जाएंगे।


Related Articles