आरंग। त्याग, बलिदान और धर्मपरायणता के प्रतीक महान राजा मोरध्वज की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव–2026 का प्रथम दिवस गुरुवार को आस्था, इतिहास और लोक-संस्कृति के भव्य संगम के साथ संपन्न हुआ। सुबह से देर रात तक चले विविध आयोजनों ने ऐतिहासिक नगरी आरंग को उत्सवमय वातावरण में सराबोर कर दिया।
महोत्सव की शुरुआत प्रातः 8 बजे प्रसिद्ध रेत कलाकार हेमचंद साहू द्वारा निर्मित राजा मोरध्वज की त्याग गाथा को दर्शाती भव्य रेत कलाकृति से हुई। इस कलाकृति ने न केवल दर्शकों को आकर्षित किया, बल्कि महोत्सव की मूल भावना को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। दोपहर 12 बजे से बाबा बागेश्वरनाथ एवं वेदमाता गायत्री की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो चंडी मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नेताजी चौक पहुँची। महामाया मंदिर में जलाभिषेक के पश्चात शोभायात्रा राजा मोरध्वज की परिक्रमा करते हुए इंडोर स्टेडियम पहुँची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया।
शाम 4 बजे बाबा बागेश्वरनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ हुआ। यह आयोजन क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के मार्गदर्शन और संकल्प से आयोजित किया जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में सुवा नृत्य पार्टी कोसमखुटा (टोमन साहू) और पंथी नृत्य पार्टी कुटेशर (सुभाष बंजारे) की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इतिहास और बौद्धिक सत्र में राजा मोरध्वज के ऐतिहासिक महत्व और त्याग पर वरिष्ठ विद्वानों ने विचार रखे। इस अवसर पर आनंद राम साहू, आर.एन. विश्वकर्मा, एल. रायकरवार एवं मुरली मनोहर देवांगन ने राजा मोरध्वज की अमर गाथा को विस्तार से प्रस्तुत किया। इसके पश्चात स्वरांजली डांस ग्रुप, आरंग द्वारा प्रस्तुति दी गई और लगभग एक घंटे तक राजा मोरध्वज की भव्य झांकी का मंचन हुआ, जिसने इतिहास को जीवंत कर दिया।
शुभारंभ अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि राजा मोरध्वज का त्याग, सत्य और धर्म छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा का आधार है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल आयोजन नहीं, बल्कि आरंग की ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। वहीं राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने महोत्सव की सराहना करते हुए इसे आरंग की गौरवशाली परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाने वाला आयोजन बताया।
देर रात्रि तक लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोक गायक सुनील सोनी की प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि, जनप्रतिनिधि, आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं नगरवासी उपस्थित रहे। प्रथम दिवस के आयोजन ने यह संदेश दिया कि राजा मोरध्वज का त्याग और आदर्श आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं।

