Chhattisgarh Surajpur News: सूरजपुर। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना प्रतापपुर विकासखंड के ग्राम रमगांव में बदहाल व्यवस्था और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। करीब 45 लाख रुपये की लागत से निर्मित पानी टंकी वर्षों बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। हालात यह हैं कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण शुद्ध पेयजल से वंचित हैं और आंगनबाड़ी के छोटे-छोटे बच्चों को आज भी घर से पानी की बोतल लेकर आना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्र के पास वर्षों से संचालित हैंडपंप ही गांव के लोगों और बच्चों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत था। जल जीवन मिशन के तहत पानी टंकी निर्माण के दौरान इसी हैंडपंप के बोर को टंकी से जोड़कर उसमें सबमर्सिबल पंप लगा दिया गया। लेकिन टंकी बनने के बाद न तो नियमित जलापूर्ति शुरू हो सकी और न ही बिजली कनेक्शन की समुचित व्यवस्था हो पाई। परिणामस्वरूप पानी टंकी कभी चालू नहीं हुई और पहले से संचालित हैंडपंप भी बंद हो गया।
आंगनबाड़ी के बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
पेयजल संकट का सबसे ज्यादा असर आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने वाले मासूम बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों को पीने के लिए अपने घरों से पानी भरकर लाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी में भोजन बनाने वाली रसोइया भी अपने घर से पानी लेकर आती है और बच्चों को उसी पानी से भोजन एवं पेयजल उपलब्ध कराया जाता है।
लाखों खर्च, लेकिन सुविधा नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई पानी टंकी आज सिर्फ शोपीस बनकर रह गई है। रखरखाव और संचालन के अभाव में संरचना भी धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही है। लोगों का कहना है कि यह स्थिति विभागीय लापरवाही और संभावित अनियमितताओं की ओर इशारा करती है। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि जल जीवन मिशन की योजना शुरू नहीं हो पा रही है तो कम से कम पहले की तरह हैंडपंप को पुनः चालू किया जाए, ताकि गांव के लोगों और बच्चों को राहत मिल सके।
ग्रामीणों में नाराजगी, उच्चस्तरीय जांच की मांग
पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण योजनाएं धरातल पर दम तोड़ रही हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और शीघ्र पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
क्या बोलीं एसडीएम?
इस संबंध में प्रतापपुर एसडीएम ललिता भगत ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। संबंधित विभाग से जवाब तलब किया जाएगा और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

