CG Bhilai News: भिलाई। वार्ड क्रमांक 45 स्थित जोन-2 अल्लपूरी सीताराम चौक, बालाजी नगर खुर्शीपार में तेलुगु समाज द्वारा आयोजित श्री श्री श्री मनिनम्मा सम्बरालु सीतला माता महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद विजय बघेल शामिल हुए। उन्होंने नगर भ्रमण के दौरान विभिन्न आकर्षक झांकियों का अवलोकन किया और सीतला माता की पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद विजय बघेल ने कहा कि भिलाई वास्तव में “मिनी भारत” की पहचान रखता है, जहां देश के विभिन्न राज्यों के लोग अपनी-अपनी संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ सौहार्दपूर्वक निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि तेलुगु समाज द्वारा आयोजित यह महोत्सव आंध्र प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि महोत्सव में प्रस्तुत की गई मनमोहक झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक धरती का साक्षात दर्शन हो रहा हो। ऐसे आयोजन समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
संस्कृति समिति के अध्यक्ष के. श्याम सुंदर राव ने बताया कि यह महोत्सव वर्षों से तेलुगु समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रहा है। इस वर्ष भी आयोजन में आंध्र प्रदेश की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करती अनेक आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनीं।
नगर भ्रमण यात्रा में भगवान बालाजी की भव्य झांकी, कोबरा डांस, अलारु नृत्य, नौ दुर्गा स्वरूप, वडुका पडम, अक्का अलाडु, जालरी संस्कृति तथा विशाखापट्टनम की प्रसिद्ध सांस्कृतिक झलकियों ने श्रद्धालुओं और दर्शकों का मन मोह लिया।
विशाखापट्टनम से आए कलाकारों ने अपने पारंपरिक कोबरा डांस और अन्य लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियों और पारंपरिक वेशभूषा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे आयोजन के दौरान “गोविंदा-गोविंदा” के जयघोष से क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।
महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, समाजजनों, महिलाओं और युवाओं ने भाग लेकर धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया तथा माता सीतला का आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन में तेलुगु युवता समिति के वरिष्ठ सदस्य, पदाधिकारी एवं समाज के गणमान्य नागरिक भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का भी सशक्त संदेश देकर संपन्न हुआ।

