Illegal Mining in Chambal : दिल्ली/ग्वालियर। मध्यप्रदेश में चंबल अभ्यारण क्षेत्र में हो रहे अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर बिना नंबर के वाहन चंबल अभ्यारण क्षेत्र में कैसे दौड़ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से भी जवाब तलब किया है।
धौलपुर, मुरैना और आगरा में हुआ निरीक्षण
दरअसल, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय विश्नोई की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (CEC) के सदस्य सीपी गोयल ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की।
रिपोर्ट में बताया गया कि कमेटी ने चंबल अभ्यारण क्षेत्र के धौलपुर, मुरैना और आगरा इलाके का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान धौलपुर और मुरैना में अवैध खनन के सबूत मिले। साथ ही अपंजीकृत वाहनों के जरिए रेत खनन और परिवहन किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
अधिकारियों को शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश
CEC की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को शपथ पत्र दाखिल कर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी यह स्पष्ट करें कि पूर्व में दिए गए आदेशों के पालन में क्या कार्रवाई की गई।
साथ ही संबंधित विभागों के प्रमुख सचिवों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
NHAI को भी बनाया गया पक्षकार
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को भी प्रतिवादी बनाया है। कोर्ट अब इस मामले में विभिन्न एजेंसियों की भूमिका की भी जांच करेगा।
मामले की अगली सुनवाई 20 मई को होगी।

