Sakti News: पावर ग्रिड के लिए 165 एकड़ जमीन प्रस्तावित, सपिया के किसानों ने किया विरोध, आंदोलन की चेतावनी

Sakti News: पावर ग्रिड के लिए 165 एकड़ जमीन प्रस्तावित, सपिया के किसानों ने किया विरोध, आंदोलन की चेतावनी

Chhattisgarh Sakti News: सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सपिया गांव में पावर ग्रिड की स्थापना के लिए कृषि भूमि के सर्वे को लेकर किसानों में नाराजगी है। किसानों का आरोप है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना जमीन की नाप-जोख की जा रही है। उनका कहना है कि पहले ही बांध और नहर निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में कृषि भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। अब पावर ग्रिड के लिए जमीन प्रस्तावित होने से उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है।

किसानों के मुताबिक, कर्रापाली जलाशय और जल संसाधन विभाग की नहर परियोजनाओं के लिए गांव की लगभग 100 एकड़ और 150 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। अब सपिया, फगुरम और अंजोरीपाली गांवों में पावर ग्रिड की स्थापना के लिए कुल 165 एकड़ जमीन प्रस्तावित बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि इस जमीन पर खेती करके ही उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है और भूमि चले जाने से उनकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

किसानों ने अपनी समस्या को लेकर कलेक्टर को पत्र सौंपा है। उनका दावा है कि वे राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांसद और क्षेत्रीय विधायक को भी ज्ञापन देकर अपनी मांग रख चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

मामले में चंद्रपुर से कांग्रेस विधायक रामकुमार यादव भी सपिया गांव पहुंचे और किसानों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को जमीन के सर्वे और प्रस्तावित परियोजना के संबंध में पर्याप्त सूचना नहीं दी गई। विधायक के मुताबिक, किसान पहले ही बांध और नहर निर्माण के कारण अपनी जमीन गंवा चुके हैं और अब बची हुई उपजाऊ भूमि पर पावर ग्रिड स्थापित करने का प्रस्ताव उनके लिए चिंता का विषय है।

विधायक रामकुमार यादव ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने और किसानों की समस्या पर विचार करने की मांग की। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया। वहीं, किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी कृषि भूमि बचाने के लिए आगे भी विरोध जारी रखेंगे। फिलहाल, प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण और सर्वे को लेकर किसानों की आपत्तियों पर प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।


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