Chhattisgarh Raipur News : रायपुर। दशकों से माओवादी हिंसा का सामना कर रहे बस्तर में अब विकास की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (LWE) प्रभावित क्षेत्रों के लिए जिला खनिज न्यास निधि (DMF) के नियमों में विशेष छूट दी है। इसके तहत खनिज वाले जिलों में जमा होने वाली DMF राशि को अब दूरदराज के संवेदनशील और पिछड़े क्षेत्रों में भी खर्च किया जा सकेगा।
अब तक DMF की राशि का उपयोग खनन क्षेत्र के 15 से 25 किलोमीटर के दायरे में ही किया जा सकता था। इस सीमा के कारण बस्तर के कई दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास राशि पहुंचाना मुश्किल था। केंद्र सरकार की नई छूट से यह भौगोलिक सीमा प्रभावी रूप से समाप्त हो गई है।
यह विशेष व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2027-28 तक लागू रहेगी। इसका लाभ बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर जिलों को मिलेगा। इन क्षेत्रों में अब पक्की सड़क, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए DMF राशि का उपयोग किया जा सकेगा।
राज्य को हर साल कोरबा से करीब 700 करोड़ रुपये और दंतेवाड़ा से लगभग 600 करोड़ रुपये का DMF फंड मिलता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में कुल 16,738 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व जुटाया गया। अगले वित्तीय वर्ष में इसके 19,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग के संचालक रजत बंसल के अनुसार, दंतेवाड़ा के कुल DMF फंड का 50 फीसदी हिस्सा अब बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा और कांकेर जिलों को वितरित किया गया है। इससे इन जिलों के संवेदनशील और दूरस्थ इलाकों में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
माओवादी गतिविधियों में कमी आने के बाद अब बस्तर में सरकार के सामने विकास के साथ लोगों का भरोसा मजबूत करने की चुनौती भी है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पेयजल, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना इस दिशा में अहम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पहले ही कह चुके हैं कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। ऐसे में DMF नियमों में मिली विशेष छूट को बस्तर के संवेदनशील इलाकों में विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

