Chhattisgarh Raipur News : रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश की पहली रामसर साइट के रूप में कोपरा जलाशय, बिलासपुर को शामिल किए जाने के बाद अब तीन अन्य महत्वपूर्ण जलाशयों को भी रामसर साइट के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनमें खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छिंदारी और पैलीमेटा जलाशय तथा जशपुर जिले का नीमगांव जलाशय शामिल हैं। निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद इन जलाशयों को अंतरराष्ट्रीय रामसर सूची में शामिल कराने की तैयारी है।
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में पिपरिया नदी पर स्थित छिंदारी जलाशय को रानी रश्मि देवी जलाशय के नाम से भी जाना जाता है। हरियाली, पहाड़ियों और जंगलों से घिरा यह जलाशय प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। बारिश के मौसम में बांध का ओवरफ्लो पानी झरने का रूप ले लेता है। वन विभाग ने यहां ‘छिंदारी के परिंदे’ नाम से इको-टूरिज्म केंद्र भी विकसित किया है।
इसी जिले के छुईखदान ब्लॉक में स्थित पैलीमेटा जलाशय को सुरही जलाशय के नाम से भी जाना जाता है। यह एक प्रमुख मध्यम सिंचाई बांध है, जिसे पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है। यह क्षेत्र समृद्ध जैव विविधता और शांत प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है।
जशपुर जिले का नीमगांव जलाशय सर्दियों में आने वाले विदेशी और साइबेरियन प्रवासी पक्षियों के कारण बर्ड वाचिंग के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहां बार-हेडेड गूज और रुडी शेल्डक समेत कई प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। हिमालय, साइबेरिया और यूरोप से आने वाले हजारों पक्षी हर साल इस जलाशय क्षेत्र में डेरा डालते हैं। यह स्थल जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है।
आर्द्रभूमियों के संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने प्रदेशभर में 500 से अधिक ‘वेटलैंड मित्र’ तैयार किए हैं। इसके अलावा 2.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली 11,098 आर्द्रभूमियों का ग्राउंड-ट्रुथिंग और बाउंड्री डिमार्केशन भी कराया गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड प्राधिकरण ने वर्ष 2030 तक प्रदेश की 20 आर्द्रभूमियों को रामसर स्थल के रूप में नामित कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए संभावित स्थलों का चयन, सीमांकन और आवश्यक मानकों को पूरा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

